मोदी सरकार ने सुदर्शन टीवी के ख़िलाफ़ जारी किया नोटिस, सुप्रीम कोर्ट में..

September 23, 2020 by No Comments

नई दिल्ली: सुदर्शन टीवी (Sudarshan TV) के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया है कि सुदर्शन टीवी को उसके शो ‘बिंदास बोल’ में ‘UPSC जिहाद’ के लिए नोटिस जारी कर दिया है. सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया है कि केंद्र ने आज 4 पेज का नोटिस जारी किया है.

इस नोटिस में कहा गया है कि चैनल को प्रोग्राम कोड के उल्लंघन के बारे में 28 सितंबर को शाम 5 बजे से पहले एक लिखित सबमिशन देने की आवश्यकता है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए. अगर नोटिस का जवाब नहीं दिया जाता है, तो एक प़क्षीय निर्णय लिया जाएगा. केंद्र के अनुसार पहली नज़र में चैनल का शो प्रोग्राम कोड के अनुसार नहीं है.

तुषार मेहता ने अदालत से आग्रह किया कि मामले की सुनवाई 28 सितम्बर तक स्थगित की जाए जिस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर मामले की सुनवाई नहीं होती तो अब तक यह शो पूरी तरह से प्रसारित हो चुका होता. हमें इसके बारे में सोचना चाहिए. एसजी तुषार मेहता ने कहा कि मुझे लगता है कि अदालत का हस्तक्षेप अंतिम उपाय होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को पाँच अक्टूबर तक टाल दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बाकी शो के प्रसारण पर रोक जारी रहेगी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सुदर्शन न्यूज को दिए गए नोटिस पर कानून के मुताबिक कार्रवाई करे. इसके बाद इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे. पांच अक्टूबर को दो बजे अगली सुनवाई होगी.

आपको बता दें कि सुदर्शन टीवी के एडिटर सुरेश चव्हाणके ने इस विवादित कार्यक्रम के दौरान कहा है कि एक तरफ़ जहाँ हिन्दुओं के लिए उम्र की सीमा 32 साल है वहीं मुस्लिम समुदाय के लिए ये 35 साल है. ये दावा पूरी तरह से झूठ है क्यूँकि दोनों ही समुदाय के जनरल विद्यार्थियों के लिए ये सीमा 32 साल है जबकि OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए ये 35 साल है.

एक और झूठ में सुरेश चव्हाणके ने दावा किया कि हिन्दू छात्र UPSC में 6 अधिकतम 6 बार बैठ सकता है लेकिन मुस्लिम के लिए 9 मौक़े दिए गए हैं. ये दावा भी झूठा है क्यूँकि हिन्दू या मुस्लिम दोनों ही 6 बार UPSC की परीक्षा में बैठ सकते है. अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को 9 मौक़े हैं और अधिकतम उम्र 35 साल है जबकि SC/ST के लिए अनलिमिटेड मौक़े रहेंगे 37 साल की उम्र तक. अदालत ने ये भी कहा कि ये सिर्फ़ मुस्लिम समुदाय को ही अपमानित कर रहा है बल्कि UPSC की परीक्षा पर भी सवाल उठा रहा है.

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