जु’मे के दिन बीवी के साथ हम बि’स्त’री कि’या जा स’कता है या नहीं, मौलाना ने बताया…

October 13, 2021 by No Comments

शरीअते इस्लामिया ने हर उस शख्स को इस बात पर मुतवज्जह किया है कि वह अपने फराइज अदा करे, अपनी जिम्मेदारियों को सही तरीक़ा पर अंजाम दे और लोगों के हुक़ूक़ की पूरी अदाएगी करे। शरीअते इस्लामिया ने हर उस शख्स को मुकल्लफ बनाया है कि वह अल्लाह के साथ बन्दों के हुक़ूक़ की पूरी तौर पर अदाएगी करे हत्ताकि बाज़ वजुह से हुकूकुल इबाद को ज़्यादा एहतेमाम से अदा करने की तालीम दी गई।

हमारे दीन में सिर्फ मज हब से जुडी ही बातों को नहीं बताया गया है बल्कि इसके साथ साथ दुनिया में जी’ते और रहने के सलीके के भी बारे में बताया गया है। दरअसल यह बात तो सभी को पता ही है कि जो भी इंसान इस दुनिया में आता है तो वह यहाँ के तमाम रस्मों रिवाज़ निभाता। उसे पढ़ाई करने होती है। शादी होती है और उसके बाद बच्चे वगैरा होते हैं। ऐसे में हमारे दीन में इन तमाम मसलों के बारे में बताया गया है।

वहीँ दुनिया में आये हर मुस लमान पर पांच वक़्त की न’मा’ज़ फ़र्ज़ की गयी है और जुमे के दिन की ख़ास अहमियत है।इसलिए यह देखा भी गया है कि कमोबेश हर मु’स्लि’म इस दिन जु’मे की न’मा’ज़ अदा करता है। जो नहीं पढता है बाकी के दिनों की वह भी पढता है। एक बात और यह जान लीजिए कि जुमे की रात को शौ’हर को अपनी बीवी के साथ हम बि’स्ता’री करने से बचना चाहिए।


जुमे और जुमरात के बीच की रात की बात हम यहाँ कर रहे हैं। वहीँ जु’मे की न’मा’ज़ बाकी न’मा’ज़ों की तरह फ़र्ज़ है इसलिए इस दिन जितनी जल्दी हो सके, इस फ़र्ज़ को अदा कर देना चाहिए। वहीँ यह भी कहा गया है कि जो लोग अपनी बीवी के साथ वो करके न’मा’ज़ से पहले गु’स’ल ए जना बत करते हैं तो ऐसे लोगों के बारे में यह बताया गया है कि न’मा’ज़ पढने पर एक ऊं’ट की क़ुर बानी, के बरा बर का सवाब मिलता है।


बहरहाल, इससे जुडी और कई अहम् जान कारी आज हम आपको इस वीडियो में देने जा रहे हैं। इसे देख कर आपको कई सारी नई बातो के बारे में पता चल जायेगा जिससे आपके इल्म में इजाफा होगा और आप गलत कामों से बच जायेंगे। सही रास्ते पर आयेंगे।

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