लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 के कुछ ही महीने बाकी रह गए हैं। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी मैदान में उतरने के लिए अपनी कमर कसना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में बहुजन समाज पार्टी भी बड़ा दांव लगाने की तैयारी में है। विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की नज़र उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण वोटर्स पर गड़ी हुई है। 23 जुलाई को बसपा ब्राह्मण मिशन की शुरुआत करने जा रही है। जिसके तहत बसपा 17 साल की खुशी दुबे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगी। खुशी दुबे कानपुर बिकरु कां’ड के मुख्य आ’रोपी विकास दुबे के भतीजे अमर दुबे की पत्नी है।
अमर दुबे को विकास दुबे का शा’र्पशूटर माना जाता रहा है। खुशी दुबे की शादी अमर दुबे से बिकरु कां’ड के 3 दिन पहले हुई थी। शादी के तीन दिन बाद ही यूपी एसटीएफ ने हमीरपुर में एनकाउंटर में अमर दुबे को मा’र गिराया था। खुशी पर ह’त्या और आ’पराधिक सा’जिश सहित आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। खुशी दुबे पिछले साल 8 जुलाई से बाराबंकी के एक किशोर केंद्र में बंद है।

बसपा के पूर्व मंत्री नकुल दुबे ने बताया कि बसपा के ब्राह्मण चेहरे और वरिष्ठ वकील, सतीश मिश्रा, अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे की रिहाई की मांग करेंगे। खुशी दुबे को अभी तक ज़मानत नही मिली है। खुशी के वकील, शिवकांत दीक्षित ने कहा, “किशोर न्याय बोर्ड की पुष्टि के बावजूद कि वह नाबालिग है, उसे जमानत नहीं मिली है। मैं उनका केस लड़ने के लिए बसपा नेतृत्व के कदम का स्वागत करता हूं।” खुशी दुबे के वकील ने यह भी कहा था कि बिकरु कांड से 3 दिन पहले ही खुशी की शादी अमर दुबे से हुई थी। इसलिए खुशी की इस कां’ड में कोई भूमिका नही हो सकती।

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