मायावती ने गठ’बंधन की एकता पर दिया ज़ोर, EV’M के ख़िलाफ़ बड़े आन्दोलन का संकेत

लोकसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और केंद्र में एक बार फिर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बनने जा रही है. जहाँ भाजपा और उसके सहयोगी जश्न में डूबे हैं वहीँ बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अपनी पार्टी और विपक्षी गठबंधन की हार को EVM की धाँध’ली से जोड़ा है. मायावती ने इस बात को माना कि सपा, बसपा और रालोद के कार्यकर्ताओं ने पूरी मेहनत और ईमानदारी से काम किया लेकिन EVM की ग’ड़बड़ी की वजह से भाजपा जीत गई.

उन्होंने कहा,”देश के राजनीतिक इतिहास में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे हैं समाज के दलित उपेक्षित वर्गों की सत्ता में भागीदारी भी बढ़ी है लेकिन इसे भी अब ईवीएम के माध्यम से सत्ताधारी पार्टी (भाजपा एंड कंपनी) ने पूरे तौर से हाईजैक कर लिया है।” उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,”ईवीएम से चुनाव कराने की यह कैसी व्यवस्था है जिसमें अनेकों प्रमाण हमारे सामने आये हैं इसलिये पूरे देश में ईवीएम का लगातार विरोध हो रहा है, और आज आये नतीजों के बाद से तो जनता का इस पर से काफी कुछ विश्वास ही खत्म हो जायेगा।”

उन्होंने कहा कि जबकि हर एक दल EVM की जगह बैलेट पेपर फिर से लाने की माँग कर रहा है, भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती..उन्होंने कहा,”चुनाव आयोग और बीजेपी को इस पर आपत्ति क्यों होती है। न तो चुनाव आयोग तैयार है और न ही भाजपा मानने को तैयार है तो इसका मतलब कुछ तो गड़बड़ है।”

उन्होंने आगे कहा,”जब मतपत्र की व्यवस्था नहीं है तो जनता ईवीएम में वोट डालती है लेकिन जनता इससे संतुष्ट नहीं है। आज पूरे देश में जनता यह देख रही है और मुझे नहीं लगता कि जिस तरीके के नतीजे देश में आये हैं वह लोगों के गले से नहीं उतर रहा है। अधिकतर सभी पार्टियां चुनाव आयोग से लगातार कह रही हैं कि वह ईवीएम के बजाये मतपत्र से चुनाव करायें तो फिर चुनाव आयोग और भाजपा को इस पर आपत्ति क्यों हो रही है। जब कोई गड़बड़ नहीं है, दिल में कोई काला नहीं है तो क्यों नही मतपत्र से चुनाव कराये जा रहे हैं।”

उन्होंने कहा,”चुनावों मतपत्र से कराये जाने की मांग पर माननीय सुप्रीम कोर्ट को भी गंभीरता से विचार करना चाहिए, ऐसी हमारी माननीय सुप्रीम कोर्ट से भी पुरजोर मांग है।” मायावती ने गठबंधन को एकजुट रखने की बात करते हुए कहा,”देश में अप्रत्याशित परिणामों के बारे मे आगामी रणनीति बनाने के लिये हमारे गठबंधन बसपा-सपा और रालोद तथा हमारी तरह पीड़ित अन्य पार्टियों के साथ भी मिलकर आगे की रणनीति तय की जायेगी। ऐसा नहीं कि हम चुप बैठ जायेंगे। बीजेपी के पक्ष में आये अप्रत्याशित चुनावी परिणाम पूरी तरह से आम जनता के गले के नीचे से नही उतर पा रहे है।”

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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