इंसान गलतियों का पुतला है। जाने अनजाने कितने ही गुनाह करता रहता है । लेकिन यह अल्लाह तअला की शान है कि जब बंदा जब सच्चे दिल से तौबा करता है तो अल्लाह उस को माफ़ कर देता है। ऐसा ही एक वाक़या बनी इज़राइल का है। “एक मरतबा अल्लाह तआला ने मूसा अ० स० से इरशाद फ़रमाया कि मेरा एक दोस्त फ़लाँ जंगल में मर गया है उस को जाकर गुस्ल दो, कफन दो, जनाज़ा पढ़ो और सारे शहर में ऐलान करो कि आज जो अपनी बख्शिश चाहता है उस के जनाज़े में शिरकत करले ,उसको भी माफ कर दूंगा।

मूसा अ० स० ने ऐलान किया , सारे लोग भागे भागे जंगल आये। आगे जा कर देखा तो वहाँ एक शराबी, जुआरी, ज़ानी ( ज़िना करने वाला) डाकू, बदमाश पड़ा हुआ है। हैरान परेशान लोग कहने लगे ,ऐ मुसा ( अ० स०) यह आप क्या कह रहे हैं। इस शख़्स को तो ,इसकी बदकारियो की वजह से हमने अपने शहर से निकाल दिया था। यह आप का रब क्या कह रहे है कि यह मेरा दोस्त है। मूसा अ० स० ने उनकी बातों को सुना तो अल्लाह तआला की और रुजूअ किया। अर्ज़ किया या अल्लाह तेरे बंदे कह रहे हैं यह तेरा दुश्मन था, तू कह रहा है यह तेरा दोस्त है आखिर यह माजरा क्या है ?

अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया कि वह भी ठीक कह रहे हैं, मैं भी ठीक कह रहा हूँ। यह ऐसा ही था, मेरा दुश्मन था। लेकिन जब मौत का वक्त आया तो इसने पाया कि यह अकेला पड़ा हुआ है। दायी और देखा कोई रिश्तेदार ,कोई अज़ीज़ नज़र नहीं आया। बायीं तरफ देखा कोई नज़र नहीं आया।गोया चारों तरफ़ देख लिया लेकिन कोई नज़र नहीं आया।सिर्फ अपनी बेबसी नज़र आयी। तब उसने मुझे पुकारा तो मुझे शर्म आई इसे अकेले तन्हा को मै इसके गुनाहों की वजह से पकड़ूँ। मुझे मेरी इज़्ज़त की कसम वह तो छोटा सवाल कर बैठा।अगर इस वक्त वह मुझ से पूरी दुनिया की बख्शिश मांगता तो मै सब को माफ कर देता।” (मौलाना तारिक़ जमील के बयान से)

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