मौला’ना फ़ि’रंगी महली ने ट्रिप’ल त’लाक़ बि’ल पा’स होने पर इन पार्टियों को बताया ज़ि’म्मेदार,’सांसद होने की क्या…’

लखनऊ: कल राज्यसभा में ट्रिपल त’लाक़ बिल पा’रित हो गया. हालाँकि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के पास ब’हुमत नहीं था लेकिन विपक्षी दलों में सूझ-बूझ की क’मी की वजह से ये हो पाया. कई पार्टियों के नेता एब्सेंट नज़र आये. इस मामले में अब मौ’लाना ख़ालिद रशीद फ़िरंगी महली ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसको लेकर विपक्ष को ज़िम्मे’दार ठहराया है.

मौला’ना फ़िरंगी महली ने कहा कि मैं विपक्ष की उन पार्टियों को दो’षी मानता हूँ जिन्होंने वाक आ’उट किया..इस समय भी, आप ग़ैर-हाज़िर हैं..फिर आपके सांसद होने की क्या ज़रूरत है. उल्लेखनीय है कि बिल पर वोटिंग के समय बसपा,तेदेपा, और टीआरएस के मेम्बर ग़ैर-हाज़िर रहे. मु’स्लिम संस्थाएँ इस बिल का वि’रोध कर रही हैं. इसका मुख्य कारण ये है कि इसमें एक सिविल लॉ को क्रि’मिनल लॉ के फॉर्म में ब’दला जा रहा है. हालाँकि भाजपा इसको महिला स’शक्ति’करण बता रही है.

आपको बता दें कि कल क़ा’नून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज मुस्लि’म महि’ला (विवाह अधिकार सं’रक्षण) विधेयक- 2019 राज्यसभा में पेश किया. प्रसाद ने इसे पेश करते हुए कहा कि तीन त’लाक नि’षेध विधे’यक मानवता, म’हिला सश’क्तिकरण और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने वाला है. भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकार को पूरी उम्मीद थी कि राज्यसभा में भी ये बिल पा’रित हो जाएगा. परन्तु भाजपा की सहयोगी जदयू ने इस बिल का वि’रोध किया और वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

ग़नीमत ये रही कि जदयू ने बिल के ख़ि’लाफ़ वोटिंग नहीं की. जदयू ने वाक-आउट करने का फ़ैसला किया. वहीँ AIADMK ने भी सदन से वाक आउट करने का फ़ैसला किया. इस बिल के बारे में बिहार राज्य के जदयू अध्यक्ष ने कहा,”तीन तला’क बिल पर सरकार को मु’स्लिम समुदाय के साथ बात करनी चाहिए थी. उनकी सहमति लेना जरूरी था. इस मामले पर अभी समाज में और जन जा’गरण की जरूरत है. सामा’जिक जागरू’कता कैम्पेन चलाना जरूरी होगा.” बीजू जनता दल ने कहा कि वो इस बिल का सम’र्थन करेगी.

बीजेडी सांसद प्रसन्ना आचार्य ने राज्यसभा में कहा- हम तीन तला’क बिल का सम’र्थन करते हैं. बीजेडी ने हमेशा महि’ला सशक्तिकरण के लिए काम किया है. हमने लोकसभा चुनाव में एक तिहाई म’हिलाओं को टिकट दिए. JDU और AIADMK के वॉकआ’उट से मोदी सरकार की राह आसान होती दिखी. वहीँ अंतिम समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऑस्कर फर्नांडिस भी पहुँच गए. ऑस्कर फर्नांडिस के अंतिम समय में आने से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने पूरी कोशिश की.

बिल को सेलेक्ट समिति में भेजने के पक्ष में सिर्फ़ 84 वोट पड़े और 100 इसके वि’रोध में पड़े. इसका अर्थ ये हुआ कि बिल को जॉइंट सेलेक्ट समिति में नहीं भेजा जाएगा. राज्यसभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने सेलेक्ट समिति के प्रस्ताव के गि’रने के बाद कहा कि हम महि’ला सशक्तिकरण चाहते हैं और इसीलिए कुछ सुझाव हमने बताये थे लेकिन स’त्ता पक्ष ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया इसलिए हमें बिल के ख़िला’फ़ वोट करना पड़ेगा. बिल राज्यसभा में पा’रित हो गया, प’क्ष में 99 और विरो’ध में 84 वोट प’ड़े.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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