मौ’लाना साद के वा’यरल ऑडियो क्लिप का स’च आया सामने, दिल्ली पु’लिस ने निकाली मी’डिया के दा’वे की हवा…

नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में मी’डिया की निष्प’क्षता और इसकी विश्व’सनीयता दोनों पर सवाल उठ रहा है. हालत यहाँ तक बिगड़ चुकी है कि चैनलों में फ़े’क न्यूज़ का कल्चर चल पड़ा है. हमने देखा था कि जब नोटबं’दी के समय कुछ चैनलों ने बताया था कि 2000 के नोट में चिप है हालाँकि ऐसा कुछ भी नहीं था. ह’द दर्जे की म’क्कारी ये कि इनमें से कईयों ने मा’फ़ी तक नहीं माँगी. ऐसे मामले पहले भी हुए हैं लेकिन अब तो मामला बहुत आगे बढ़ चुका है.

अब मीडिया सूचना को बताता नहीं बल्कि ख़ुद सूचनाएँ बनाता है. कुछ इसी तरह का मामला दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़(Nizamuddin Markaz) में सामने आया है. ख़बर है कि दिल्ली पु’लिस की जाँच में सामने आया है कि जिस वायरल ऑडियो क्लिप को आधार बना कर बार-बार कुछ मीडि’या चैनल कह रहे थे कि तबलीग़ जमात(Tableegh Jamat) के मौलाना साद को’रोना वायरस को लेकर लाप’रवाही को लेकर दो’षी हैं, उसमें एडिट किया गया है. इसका अर्थ है कि वो ऑडियो क्लिप फ़’र्ज़ी है.

इस ऑडियो क्लिप में कथित रूप से कहा जा रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो नहीं करना है. हालाँकि अब ये साफ़ हो गया है कि ये ऑडियो क्लिप फ़े’क है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ दिल्ली पुलि’स क्राइम ब्रांच ने अपनी प्रारंभिक जाँच में पाया है कि मौलाना साद कांधलवी के ख़ि’लाफ़ FIR में जो ऑडियो क्लिप उल्लेखित है उसमें छे’ड़छाड़ की संभावना है. ऐसा लगता है कि ये कई फाइलों को जोड़कर बनाया गया है. पु’लिस ने अब सभी ऑडियो क्लिप और कथित डॉकटर्ड क्लिप को फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में भेज दिया है.

FIR एसएचओ (हजरत निज़ामुद्दीन) मुकेश वालिया की एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी. इसके मुताबिक़,”मौलाना मोहम्मद साद की एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग 21 मार्च को व्हाट्सएप पर सर्कुलेट की गई थी, जिसमें स्पीकर को उनके अनुयायियों से कथित तौर पर कहते हुए सुना गया था कि लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करें और मर्कज के धार्मिक कार्यक्रम में भाग लें.”

इस तरह की ख़बरें आने के बाद वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने अहम् सवाल उठाया है. उन्होंने टीवी चैनलों पर निशाना साधते हुए कहा है,”सवाल उठता है कि मौलाना साद का वह फ़’र्जी ऑडियो क्लिप किसने बनाया? चैनलों तक उसे किसने पहुँचाया? चैनलों ने बिना जाँच किए उसे क्यों चलाया? तबलीग के ख़ि’लाफ़ वह ऑडियो क्लिप एकमात्र सबूत है। उसके फ़’र्ज़ी साबित होने के बाद अब चैनलों की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिये।” एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘तबलीगी जमात मामले में सबसे बड़े षड्यंत्र का सनसनीख़ेज़ खुलासा। मौलाना साद के जिस ऑडियो क्लिप के सहारे चैनलों ने बताया था कि तबलीग वाले सोशल डिस्टेंसिंग के ख़ि’लाफ़ हैं, वह क्लिप फ़’र्ज़ी। तबलीग ने ऐसा कभी कहा ही नहीं।’

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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