नई दिल्ली: 7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के दैरान पहला कैबिनेट विस्तार किया। पीएम मोदी की इस कैबिनेट विस्तार में यह खास बात रही कि इसमें कई युवा नेताओं को अवसर दिया गया। लेकिन इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन, सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सूचना प्रौद्योगिकी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो जैसे बड़े नेताओं की कैबिनेट से छुट्टी कर दी। कुल 12 मंत्रियो ने कैबिनेट से अपने इस्तीफे दिए। पीएम मोदी ने अपनी कैबिनेट में कुल 43 नए चेहरों को शामिल किया है। जिसमें से 12 महिला मंत्री हैं।

इस्तीफा देने वाले मंत्रियो में से बीजेपी के नेता बाबुल सुप्रियो ने गुरुवार को अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा था कि, “मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा गया तो मैंने दे दिया।” बाबुल सुप्रियो की इस पोस्ट को लेकर बीजेपी के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने नाराज़गी जताते हुए प’लटवार किया है। एचटी बांग्ला की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिलीप घोष ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि बुधवार को इस्तीफा देने वाले 12 मंत्रियों में से सिर्फ उन्होंने (बाबुल सुप्रियो) ने ऐसी टिप्पणी की थी, जो बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के फैसले से उनकी नाराजगी जाहिर करती है।

बाबुल सुप्रियों ने गुरुवार को अपने अधिकारिक फेसबुक पोस्ट पर लिखा था, ”मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा गया तो मैंने दे दिया है।” हालांकि कुछ वक्त बाद बाबुल सुप्रियों ने इस फेसबुक पोस्ट को डिलीट कर दिया। बाद में उन्होंने इस पोस्ट की सफाई में एक और पोस्ट किया। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में लिखा, ”हां, धु’आं तभी उठता है, जब कहीं न कहीं आ’ग लगी होती है। आज मैं अपने मीडिया के दोस्तों का फोन कॉल नहीं ले पा रहा हूं…।

इसलिए सोचा खुद ही बता दूं। हां, मैंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। (पहले जो मैंने कहा, बात कहने का वो तरीका सही नहीं था, मैंने पहले कहा था कि मुझे इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।)” बाबुल सुप्रियो के इस फेसबुक पोस्ट पर दिलीप घोष ने कहा, ” उन्होंने (पीएम मोदी) ने उनका (सुप्रियो का) इस्तीफा मांगा ताकि कोई और जिम्मेदारी ले सके। इसी तरह एक पार्टी काम करती है। आपको एक पार्टी नेता होने के तौर पर नियत प्रक्रिया में विश्वास रखने की जरूरत है। आप सोचिए इस्तीफा मांगने की जगह अगर वह इसके बजाय निकाल दिया जाना था तो क्या इससे चीजें बेहतर होतीं?”

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