ममता बनर्जी को हराकर भी भाजपा को कुछ नहीं हुआ हासिल, संविधान के इस अनुच्छेद की वजह से..

नई दिल्ली: रविवार को पश्चिम बंगाल के चुना’वी नतीजे सामने आ गए हैं। तृणमूल कांग्रेस को भा’री बहुमत के साथ जीत हासिल हुई है। 292 सीटों में से 213 सीटों पर टीएमसी ने अपनी जीत दर्ज की है। लेकिन टीएमसी नेता नन्दीग्राम से चुनाव हा’र गईं। आज वो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रही हैं। अब ऐसी स्थिति में कई लोगों के मन मे यह सवा’ल उठ रहा है कि हारे हुए नेता के मुख्यमंत्री बनने में क्या बाधा’एं हैं।

संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियु’क्ति करेंगे और मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल अन्य मंत्रियों की नियुक्ति करेंगे। अनुच्छेद 164.4 के अनुसार, ऐसा मंत्री जो छह महीने तक विधानसभा का सदस्य नहीं बना है, वह छह माह का समय बीतने के बाद ह’ट जाएगा। 1971 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर त्रिभुवन नारायण सिंह को मुख्यमंत्री बनाने के खिला’फ सुप्रीम कोर्ट में याचि’का दायर की गई थी।

इसके बाद सीताराम केसरी को केंद्रीय मंत्री बनाने और एचडी देवगौड़ा को प्रधानमंत्री बनाने के माम’ले भी तभी सर्वोच्च अदालत में आए थे। ये सभी नेता चुनाव के समय किसी सदन के सदस्य नहीं चुने गुए थे। उत्तर प्रदेश के त्रिभुवन नारायण सिंह के मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि अनुच्छेद 164.1 के तहत जो व्यक्ति किसी विधायी सदन का सदस्य नहीं है तो उसे मुख्यमंत्री नही बनाया जा सकता।

लेकिन इलाहबाद हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारि’ज करते हुए कहा था कि बिना चुनाव जीते भी मुख्यमंत्री अन्य मंत्रियों की तरह छह महीने तक पद पर रह सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 164.1 में लिखे मंत्री शब्द में मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि हर मामले में अनुच्छेद 164.4 लागू होगा यानी छह माह बाद किसी सदन का सदस्य नहीं चुने जाने की स्थिति में वह व्यक्ति अपने पद से हटा हुआ माना जाएगा।

क्या गैर निर्वाचित व्यक्ति कुछ समय बीतने के बाद दो बार पद पर आ सकता है ? सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल का जवाब पंजाब के एक मामले में दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी सदन का सदस्य निर्वाचित हुए बिना किसी व्यक्ति को छह महीने का समय बीतने के बाद मंत्री या अन्य पद दिए जा सकते। यह संविधान के अनुच्छेद 146.4 की आत्मा के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 164.4 सामान्य नियमों के एक अपवा’द की तरह से है, इस प्रावधान के अनुसार यदि व्यक्ति छह महीने की ग्रेस अवधि के अंदर निर्वाचित नही हो पाता तो उसे पद छोड़’ना होगा।

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