महाराष्ट्र सियासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फ़ैसला, कल इतने बजे तक सिद्ध करना…

भारत राजनीति

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में आज महाराष्ट्र सियासी संकट पर अहम् फ़ैसला आया. इस फ़ैसले के बाद अब बहुत कुछ इस बात पर निर्भर कर रहा है कि विधानसभा में किस दल के पास में बहुमत सिद्ध होगा. सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के आने से पहले ही ये ख़बर आयी है कि महाराष्ट्र कांग्रेस ने अपना विधायक दल का नेता बालासाहेब थोराट को बनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में बहुमत सिद्ध करने के लिए 27 नवम्बर शाम पाँच बजे तक का समय दिया है. ये प्रक्रिया लाइव टेलीकास्ट के ज़रिये होगी.

इससे पहले कल सुनवाई के दौरान अदालत ने हर पक्ष को बराबर से सुना. भाजपा की ओर से जहाँ बार बार अधिक समय की मांग को जायज़ ठहराने की कोशिश की गई वहीँ कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना के वकीलों ने कहा कि जब बहुमत होने का दावा भाजपा कह रही है तो सिद्ध करने में देरी क्यूँ कर रही है. महाराष्ट्र भाजपा की तरफ़ से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि फ़लूर टेस्ट के लिए अदालत राज्यपाल को 24 घन्टे में कराने को नहीं कह सकती..उचित समय सात दिन है.

कपिल सिब्बल ने कोर्ट में विप’क्ष की ओर से कहा “ऐसा कौन सा आपा’तका’ल था जिसके कारण रा’तोंरा’त सर’कार बनाने की मंज़ूरी दी गयी थी और शप’थ भी दिलवा दी गयी। इस आपा’तका’ल की जान’कारी दी जाए। NCP और भाजपा अलग- अलग विचारधा’रा की पार्टी है और ऐसा कौन सा आपा’तका’ल आ गया था जिसके कार’ण इन दोनों पार्टी को साथ लेकर तुरंत पार्टी बना दी गयी। 20 दिन तक राज्यपाल रुके लेकिन 20 घंटे नहीं रु’क पाए”

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस-एनसीपी-शिवसेना ने अपील दायर की है जिसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व में गठित हुई सरकार को अदालत तुरंत ही बहुमत सिद्ध करने के लिए कहे. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कल सुनवाई में सरकार के वकीलों से कहा था कि वो उस समर्थन पत्र को पेश करें जो राज्यपाल को सौंपा गया था. आज जब इसकी सुनवाई हुई तो सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उनके पास में ओरिजिनल डॉक्यूमेंट हैं.

तुषार मेहता ने अदालत से समय माँगा है कि सरकार को कुछ पक्ष रखने के लिए और वक़्त दिया जाए. अपने समर्थन पत्र में अजीत पवार ने लिखा है जिस पर नवम्बर 22 तारीख़ पड़ी हुई है. इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन हमेशा के लिए नहीं चल सकता है और एक स्थिर सरकार की ज़रूरत है..इस पत्र में लिखा गया है कि भाजपा ने पहले अजीत पवार से समर्थन माँगा था लेकिन तब एनसीपी के विधायक तैयार नहीं थे इस वजह से उन्होंने इसको मना कर दिया था.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट में सोलिसिटर जनरल कहते हैं कि अभी की स्थिति ये है कि राज्यपाल ने बहुमत वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए invite किया..देवेन्द्र फडनवीस ने दावा पेश किया जिसमें अजीत पवार का समर्थन पत्र था और 11 अन्य विधायकों का समर्थन पत्र था. इसके बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति से आग्रह किया कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाया जाए..राज्यपाल ने अपने विवेक का सहारा लेते हुए सबसे बड़ी पार्टी को invite किया..देवेन्द्र फडनवीस के पास 170 विधायकों का समर्थन है.

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