मध्य प्रदेश सियासी संक’ट पर कांग्रेस की भाजपा को चुनौ’ती,’आपको करना है तो..’

भारत राजनीति

भोपाल. मध्य प्रदेश सियासी घमासान में अब कांग्रेस सरकार की ओर से एक नया बयान आ रहा है. ये बयान मध्य प्रदेश सरकार में क़ानून मंत्री पीसी शर्मा ने दिया है. उन्होंने कहा है कि जब तक बेंगलुरु से विधायकों को मध्य प्रदेश वापिस नहीं लाया जाता, फ्लोर टेस्ट नहीं होगा. इससे पहले राज्‍यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ सरकार को 17 मार्च को फ्लोर टेस्‍ट कराने का निर्देश दिया था. क़ानून मंत्री ने हालाँकि ये भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो आदेश देगा उसका पालन किया जाएगा.

उन्होंने बेंगलुरु में रखे गए विधायकों को लेकर बीजेपी पर झूठ बोलने का भी आरो’प लगाया है. इसके पहले मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा पर तंज़ कसते हुए कहा था कि जिसे लगता है सरकार अल्पमत में है वो अविश्वास प्रस्ताव लाये. इसके पहले ऐसी संभावना लगाईं जा रही थी कि 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. इसके बाद राज्यपाल से मिलकर भाजपा नेताओं ने माँग की कि फ्लोर टेस्ट जल्द से जल्द कराया जाए.

Kamalnath

उनकी माँग को मानते हुए राज्यपाल ने 17 मार्च यानी कि आज की तारीख़ पर फ्लोर टेस्ट कराने का निर्देश दिया. आपको बता दें कि फ्लोर टेस्ट पर अंतिम फ़ैसला लेने का अधिकार स्पीकर का होता है. ऐसे में राज्यपाल स्पीकर को निर्देश दे सकता है, हालाँकि फ्लोर टेस्ट में जान-बूझकर देरी होने पर राज्यपाल के पास सरकार को बर्ख़ास्त करके राष्ट्रपति शासन लगाने का अधिकार होता है. परन्तु अभी ऐसा कुछ होगा, ऐसा नहीं लग रहा है.

कांग्रेसी नेता माँग कर रहे हैं कि उनके जो भी विधायक बेंगलुरु में हैं उन्हें प्रदेश वापिस लाया जाए. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बेंगलुरु पहुँचे भी थे मगर उनको विधायकों से नहीं मिलने दिया गया. आपको बता दें कि 16 मार्च को विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग भाजपा चाह रही थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और कार्यवाई को 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

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