बचपन में सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को था इस चीज़ का शौक़, इस तरह दुनिया भर में सऊदी अरब का..

June 15, 2019 by No Comments

हम सभी जानते हैं कि दुनिया में हर एक इंसान जो वैश्विक पटल पर नाम कमाता है उसकी कामयाबी में हाथ उसके गुरु का भी होता है. दुनिया के आप कितने ही ताक़’तवर इंसान क्यूँ न बन जाएँ लेकिन आपका एक गुरु ज़रूर होता है जिसकी आपने शिक्षा ली होती है. आपका गुरु आप के बारे मे कुछ ऐसी बातें ज़रुर जानता है जिसे बाक़ी दुनिया नहीं जानती हो। स्ऊदी अरब के प्रिंस सलमान के गुरु और बीबसी अरबी संवाददाता राशिद सेक्काई सऊदी ने भी अपने एक लेख मे प्रिंस सलमान के बारे मे दिलचस्प खुलासे किये हैं।

राशिद सेक्कई के अनुसार मोहम्मद बिन सलमान को बचपन मे पढ़ाई से अधिक राजमहल के सुरक्षाकर्मियों में दिलचस्पी थी और वो उनके साथ वक़्त बिताना पसंद करते थे।वो अपने सभी भाइयों में बड़े थे और अपने मन से काम करना अधिक पसंद करते थे।बाद मे प्रिंस सलमान की उनके शिक्षक से दोस्तों हो गई थी और वह उनके साथ खेलना पसंद करते थे। प्रिंस सलमान को बचपन मे वाकी टाकी का बहुत शोक था।एक बार उन्होंने राजमहल के एक सुरक्षाकर्मी से वॉकी-टॉकी लिया था ।

वह अपने क्लास मे वॉकी-टॉकी के ज़रिए अपने टीचर के बारे में टिप्पणी करते थे और अपने भाइयों और सुरक्षाकर्मियों को चुटकुले सुनाते थे।राजकुमार सलमान की पढ़ाई ऐशोआराम के बीच हुई थी। यहाँ तक के उनके सभी शिक्षकों पर सीसीटीवी कैमरे से नज़र रखी जाती थी।प्रिंस सलमान के पिता और सऊदी अरब के शाह उनके शिक्षकों से मुलाकात करके उनकी पढ़ाई के बारे मे जानकारी लिया करते थे। उस दौरान सभी शिक्षकों को राजमहल के कड़े नियमों का पालन करना पड़ता था।

अब मोहम्मद बिन सलमान 33 साल के हो चुके हैं और देश के रक्षा मंत्री का पदभार संभाल चुके हैं साथ ही वह राजगद्दी के उत्तराधिकारी भी हैं।साल 2017 में शाह सलमान ने अपने पुत्र मोहम्मद बिन सलमान को अपना उत्तराधिकारी बना दिया था।देश विदेश मे सऊदी अरब के उत्तराधिकारी मोहम्मद बिन सलमान की छवि एक सुधारक की है जो देश को आधुनिक बनाना चाहते हैं।

हालांकि देश के रूढ़िवादी धार्मिक नेताओं ने उनका विरोध किया है लेकिन वो आर्थिक और समाजिक सुधारों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उत्तराधिकारी बनना से पूर्व ही 2016 में उन्होंने सऊदी सल्तनत में सुधार का एजेंडा रखते हुए ‘विज़न-2030’ नाम का एक दस्तावेज़ जारी किया और एक सुधारक के रूप में अपनी छवि पेश कर दी थी। उन्होंने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक कमेटी बनाई है इसके चेयरमैन वह ख़ुद हैं।

उनकी इस भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के तहत कई आला अधिकारियों को हिरासत में लिया गया जिनमें से कई राज परिवार से ही थे। इसके अलावा कई मंत्रियों और शीर्ष व्यवसायियों को भी गिरफ़्तार किया गया।देश विदेश मे उनकी सुधार की कोशिशों को काफ़ी सराहा गया है लेकिन साथ ही मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामले में उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। सऊदी अरब एक तरफ़ उनके नेतृत्व में जहां यमन के साथ यु’द्ध में फंसा हुआ है वहीं दूसरी ओर पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की मौ’त के बाद उन पर कई आरोप लगे हैं।

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