पटना: बीते दिनों बिहार के बक्सर के पास गंगा नदी में कई श’व बहते हुए नज़र आये जिसके बाद बिहार सरकार की आ’लोचना होने लगी। बिहार सरकार ने कहा था कि ये श’व उत्तर प्रदेश से बहकर आए हैं। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने बिहार सरकार के इस बयान को ग़लत बताया है. वहीं, इस मामले पर पटना हाई कोर्ट में एक पीआईएल दायर की गई है।

सोमवार को या’चिका की सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की तरफ से अधिकारियों की ओर से वि’रोधाभासी जवाब दिए गए थे। बिहार सरकार द्वारा गंगा नदी में मिले श’वों की सही जानकारी न दिए जाने पर बिहार में सि’यासत शुरू हो गई। पटना हाईकोर्ट में सु’नवाई के दौरान प्रदेश मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि 1 से 13 मई के कोविड-19 की दूसरी लहर में बक्सर में केवल 6 मौ’तें हुईं।

दूसरी तरफ, पटना के मंडल आयुक्त ने बताया कि 5 मई से 14 मई के बीच बक्सर के केवल एक घाट पर 789 लाशों का अंतिम संस्कार हुआ। इन दोनों ही अधिकारियों के जवाब में विरोधाभास नज़र आये जिसे हाईकोर्ट ने भांप लिया। इस मामले में हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार को 19 मई तक स्थिति साफ करने का आ’देश दिया है।

पटना हाईकोर्ट में बक्सर में हुई मौ’तों पर अधिकारियों द्वारा विरोधाभास जानकारी दिये जाने पर राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने स’वाल खड़े किये हैं। राजद प्रमुख ने ट्वीट कर कहा, “सत्ता में बैठे जालसाज बक्सर में हुई मौ’तों को छुपा रहे हैं।

पटना हाईकोर्ट में राज्य के मुख्य सचिव ने 6 मौ’तें बताई तो वहीं कमिश्नर ने 789 श’वों के अंतिम संस्कार होने की बात कही। इन दोनों में से कौन सच कह रहा है ? उन्होंने आगे कहा, बक्सर जिला में 1100 से अधिक गाँव है। पता कर लीजिए प्रत्येक गाँव में औसत कितनी मृत्यु हुई?

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