क्यूँ रिया के पीछे पड़ा है मीडिया का एक गुट, क्या सज़ा से पहले ही दो’षी..

August 26, 2020 by No Comments

सुशांत की मौ’त के बाद इस बारे में चर्चा होने लगी कि सुशांत और रिया चक्रवर्ती के बीच क्या रिश्ता था। ये बहस अभी शुरू ही हुई थी कि मी’डिया में कई तरह की थेओरीज़ आने लगीं कि सुशांत ने सुसा’इड नहीं की, उनका ख़ून हुआ है।बहुत से मी’डिया चैनल ने नेपोटिज़्म कारण बताया। बहुत से ऐसे फ़िल्म स्टार जो कभी सुशांत से मिले ही नहीं थे, उन तक के नाम मी’डिया में आने लगे। हालत ये हो गई कि जो सुशांत से मिले थे उन पर इसलिए श’क कि वो क्यों मिल रहे थे और जो नहीं मिले थे वो सुशांत से चि’ढ़ रखते थे।

मी’डिया को तब ब्रे’किंग मसा’ला मिला जब सुशांत के पिता ने FIR लिखवाई। इस FIR को उन्होंने बिहार में दर्ज कराया जबकि सुशांत की मौ’त मुंबई में हुई थी। इसमें उन्होंने रिया और रिया के परिवार पर संगी’न इ’ल्ज़ाम लगाए। रिया पर 15 करोड़ ग़बन करने का आ’रोप भी लगाया गया। कुछ मी’डिया हाउस ने बाक़ी सारी न्यूज़ छोड़कर इस मुद्दे पर फ़ोकस कर दिया। मेन स्ट्रीम ‘न्यूज़ चैनल’ कोरोना, बाढ़ सब भुलाकर इस पर लग गए। ‘जस्टिस फ़ॉर सुशांत’ के नारे को लगाकर TRP बढ़ाने का खेल शुरू हो गया।

मी’डिया में हर वो शख़्स आने लगा जो किसी भी तरह से सुशांत को जानता था, मिला था या फिर इस मुद्दे से जुड़ा था। सबको TRP मिल रही थी, जो लोग सुशांत से कुछ साल पहले मिले थे वो भी इस डिबेट में शामिल रहे। किसी ने शिवसेना के एक बड़े नेता का नाम बिना किसी सोर्स के ले दिया तो एक मीडि’या हाउस ने उसको ही मेन स्टोरी बना दिया। हालत ये हो गई कि कोई कुछ भी कह दे वो हेडलाइन हो गया। इस पूरे ब’वाल के बीच केस CBI के पास आ गया। इस मरहले पर एक दो चैनल ने तो ऐसे रियेक्ट किया मानो अब तो जीत हो गई।

दिन गुज़रे लेकिन हर दिन रिया चक्रवर्ती पर इल्ज़ा’म लगता रहा। सिर्फ़ इल्ज़ाम ही नहीं, मी’डिया के डिबेट रूम में ये तक तय होने लगा कि रिया को सज़ा दी जाए। मीडि’या से बात सोशल मी’डिया और सोशल मीडि’या से मी’डिया तक बातें पहुँचती रहीं। स्थिति ये है कि रिया चक्रवर्ती के पक्ष में अगर कोई आकर बयान दे दे तो बयान देने वालों को कोसा जाने लगा है, उन्हें कहा जाने लगा है कि उन्होंने पैसा खाया है। रिया और रिया के वकील जाँच एजेंसियों में भरोसे की बात कह रहे हैं। अब इस मामले को नारकोटिक्स का मामला माना जा रहा है तो उस सिलसिले में भी रिया ने कहा कि वो डीएनए टेस्ट के लिए तैयार हैं।

रिया दो’षी हैं या नहीं इसका फ़ैसला अदाल’त करेगी न कि TRP के भूके चैनल। मी’डिया का काम जानकारी देना है न कि किसी के हक़ या ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाना। पिछले कुछ रोज़ में मीडि’या का स्तर बुरी तरह गि’रा है, इस मामले में उसमें और गि’रावट दर्ज हुई है। ‘जस्टिस फ़ॉर सुशांत’ के नारों के बीच जस्टिस कम और TRP ज़्यादा सुनाई देती है। अगर किसी को जस्टिस चाहिए तो जस्टिस सिस्टम पर उसे भरोसा भी करना होगा। जाँच एजेंसियाँ काम कर रही हैं, हमें भी अपना काम करना चाहिए।

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