क्या भाजपा से हो गई बड़ी चूक? अजीत पवार ने एनसीपी ही नहीं देवेन्द्र फडनवीस को भी दिया धोका?

मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद से यहाँ सियासी संकट बरक़रार है. चुनाव के नतीजों के बाद लगा था कि भाजपा-शिवसेना मिलकर सरकार बना लेंगे लेकिन शिवसेना ने भाजपा को 50-50 फ़ॉर्मूला की याद दिलाई. भाजपा ने इस फ़ॉर्मूला को सिरे से ख़ारिज कर दिया. शिवसेना का दावा था कि भाजपा ने चुनाव से पहले गठबंधन में ये कहा था कि मुख्यमंत्री पद भी बंटेगा और दोनों दलों का मुख्यमंत्री ढाई ढाई साल के लिए होगा. भाजपा ने शिवसेना की बात नहीं मानी जिसके बाद शिवसेना भाजपा से अलग हो गई.

इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस से बात करना शुरू किया. इस बीच भाजपा की ओर से बहुत ज़्यादा गतिविधि नहीं हुई. जब राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया तब भी भाजपा ने सरकार बनाने में असमर्थता दिखाई. लम्बी बातचीत के बाद जब ये ख़बर आयी कि एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना मिलकर सरकार बनायेंगे और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे होंगे. तब ऐसा लगा कि अब सियासी संकट ख़त्म हुआ लेकिन अगले दिन सुबह होने से पहले ही ये ख़बर आ गई कि भाजपा ने एनसीपी के अजीत पवार के साथ मिलकर सरकार बना ली है.

भाजपा ने जश्न मनाना शुरू कर दिया और शुरू के एक दो घन्टे तो ऐसा लगा मानो भाजपा ने हारी बाज़ी जीत ली. परन्तु कुछ ही घण्टों में शरद पवार एक्शन में आये और जिन विधायकों के समर्थन का दावा अजीत पवार कर रहे थे वो विधायक शरद पवार के साथ खड़े नज़र आये. शाम होने से पहले ही शरद पवार ने बाज़ी को पूरी तरह पलट दिया. एनसीपी-कांग्रेस-शिवसेना आक्रामक होकर कहने लगे कि बहुमत है तो सिद्ध करो.इसी मांग को लेकर इन तीनों दलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखाया.

दिलचस्प ये है कि राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी जहाँ शिवसेना और एनसीपी को 2 दिनों का और समय देने को तैयार न थे, उन्होंने भाजपा को 14 दिन की मोहलत दे दी. सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाई पहले एक दिन को टली और फिर फ़ैसले के लिए 26 नवम्बर का दिन तय किया. ऐसा लगा कि भाजपा इस वक़्त को अपनी चीज़ें सुधारने में लगाएगी. मीडिया ऐसी ख़बरें दिखाने लगा कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस अपने विधायकों को होटल से होटल शिफ्ट कर रहे हैं ताकि कोई विधायक भाजपा के सम्पर्क में न आये. भाजपा और सभी के सोचने से कहीं अलग शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने एक ट्वीट किया.

राउत ने इस ट्वीट में महाराष्ट्र के राज्यपाल को टैग करते हुए कहा कि ग्रैंड हयात आइये और देखिये हमारे 162 विधायक एक साथ. इसके बाद तो जैसे मीडिया की सभी गाड़ियां उसी ओर जाने लगीं. भाजपा को भी शिवसेना,एनसीपी,कांग्रेस का ये क़दम ऐसा लगा मानो बाज़ी पूरी तरह से गई. तीनों दलों ने अपने विधायकों को एक साथ दिखा दिया. इस पूरे शो में भाजपा की इमेज को बहुत बड़ा धक्का लगा. रात ही रात में सरकार बना लेने वाली पार्टी को दिन के उजाले में इस बुरी तरह से शिकस्त झेलनी पड़ी.

हालाँकि अभी फ्लूर टेस्ट बाक़ी है और आज सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया है कि वो कल शाम पाँच बजे से पहले तक हो जाए. परन्तु विपक्ष ने बड़ी मोरल विक्ट्री हासिल कर ली है. भाजपा के बड़े नेता अब इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं. एक समय सरकार बनने के बाद पूरी आक्रा’मकता से सामने आने वाले भाजपा के नेता और केन्द्रीय मंत्री राज्य के नेताओं को ही सब कुछ हैंडल करने देना चाहते हैं ताकि हार हो तो केन्द्रीय नेतृत्व पर कोई सवाल न खड़ा करे. जानकार मानते हैं कि भाजपा ने अजीत पवार पर कुछ ज़्यादा ही भरोसा कर लिया लेकिन अब ये रणनीति पूरी तरह से नाकाम होती दिख रही है.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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