क्या आप जानते हैं कि नमाज़ के बाद सर पर हाथ रखकर क्या पढ़ा जाता है? आइये जानते हैं..

January 19, 2021 by 1 Comment

अस्सलाम वालेकुम. हर मुसलमान पर नमाज़ फ़र्ज़ है और हम में से अधिकतर मुसलमान हैं जो पाँच वक़्त की नमाज़ भी पढ़ते हैं वहीँ इसमें शायद ही कोई दो राय हो कि जुमे की नमाज़ पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत अधिक होती है. रमज़ान के महीने में हमने देखा है कि नमाज़ियों की तादाद में इज़ाफ़ा हो जाता है. दोस्तों, हम देखते हैं कि नमाज़ हो जाने के बाद कई नमाज़ी अपने हाथ अपने सर पर रख लेते हैं और दुआ पढ़ने लगते हैं.

अज़ीज़ दोस्तों, हम आपको बताएंगे कि नमाज़ के बाद सर पर हाथ रख कर क्या पढ़ना चाहिए। लेकिन उससे पहले हम आपको यह बताना चाहते हैं कि नमाज के बाद सर पर हाथ रख कर कोई वजीफा या दुआ पढ़ना फर्ज या वाजिब नहीं है. असल में नमाज़ के बाद कोई वज़ीफ़ा पढ़ना जैसे अपनी याददाश्त को ठीक करने के लिए, कमज़ोरी को कम करने के लिए, या इसी तरह की अन्य ज़रूरतों के लिए.

इस तरह के कलमात के द्वारा इलाज करने का सुबूत हदीसों में दिया गया है. जैसा कि बुखारी शरीफ की हदीस में है हज़रत आयशा र.अ. से रिवायत है कि आप फरमाती है कि जब आप सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम बीमार होते तो सूरह इखलास कसरत से पढ़ते सूरह फलक सूरह नास पढ़कर अपने ऊपर फूंक मा-रते। फिर जब आपकी की तकलीफ ज्यादा हो जाती थी तो मैं इन सूरतों को नबी ए करीम पर पढ़ती थी.

अपने हाथों को बरकत की उम्मीद से आपके जिस्मे मुबारक पर फेरती थी. तो भाइयों और बहनों इस हदीस से यह साबित होता है कि ऐसे कलीमात जिनका माने दुरस्त हो जिनका माना सही हो उनको पढ़कर फुंकना या वजीफा करना जायज है। सर पर हाथ रखकर कुछ पढ़ना भी इसी तरह का काम है इसलिए यह भी जायज और दुरुस्त है और खुद प्यारे नबी से यह काम साबित है कि आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम नमाज के बाद सर पर हाथ रखकर कुछ पढ़ा करते थे. जैसा कि हजरत अनस र. अ . से रिवायत है।

हजरत अनस कहते हैं कि जब रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम फर्ज नमाज से फारिग होते तो अपने दाएं हाथ से अपनी पेशानी पर मसा फरमाते। यानी कि वह अपना दायां हाथ अपने माथे पर रखते और यह अल्फाज पढ़ते “बिस्मिल्लाह हिल लज़ी ला इलाहा इल्ला हूवर राह्मानुर्रहीम,अल्लाह हुम्मा अज़हीब अन्नील हम्मा वल हजना” इस दुआ का तर्जुमा है कि ” अल्लाह के नाम से शुरू जिसके सिवा कोई माबूद नहीं है, वो बड़ा मेहरबान निहायत ही रहम वाला है- ए अल्लाह मुझसे ग़म और मुसीबत को दूर फरमा”। प्यारे भाइयों औऱ बहनो इस हदीस से हमे यह पता चला कि सर पर हाथ रख के नमाज़ के बाद पढ़ना जायज़ है. (इस पोस्ट को दुबारा अपडेट किया गया है)

One Reply to “क्या आप जानते हैं कि नमाज़ के बाद सर पर हाथ रखकर क्या पढ़ा जाता है? आइये जानते हैं..”

  1. ممتاز عالم says:

    بدعت کی نحوست سے سنت غائب ہو جاتی ہے فرض نماز کے بعد کی سنت اللہ اکبر پڑھنالیکن انسان کو خدا بننے میں بڑا مزا آتا ہے علماء سوء نے اپنا حکم چلاتے ہوے وظیفہ خوانی میں لگا دیا چونکہ ان بے چاروں کو نقد پر ہی اطمینان ہے

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