सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अमरीका ने लिया बड़ा फ़ैसला, ईरान के ख़’तरे को लेकर…

वाशिंगटन डीसी: संयुक्त राज्य अमरीका ने सऊदी अरब के तेल मैदानों पर हुए हमले को गंभीरता से लिया है। शनिवार के रोज़ सऊदी अरामको पर हुए हमले के बाद सऊदी तेल उत्पादन 50% तक कम हो गया है। इस हमले की ज़िम्मेदारी यमन के हौथी विद्रोहियों ने ले ली है मगर अमरीका और सऊदी अरब का दावा है कि ये हमला ईरान की ज़मीन से किया गया है।

इस हमले ने पश्चिम एशिया में हालात फिर मुश्किल कर दिए हैं। वहीं इससे सऊदी अरब की सुरक्षा में चूक भी नज़र आ रही है। सऊदी मिलिट्री के पास इस तरह के हमले को रोकने के लिए कोई जवाब नज़र नहीं आ रहा है। इसी बात को समझते हुए अमरीका ने फ़ैसला किया है कि वो सऊदी अरब में दुबारा सैन्य डिप्लॉयमेंट करेगा जो डिफेंसिव ही होगा। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसको लेकर मंज़ूरी दे दी है। सऊदी अरब के अलावा अमरीकी फ़ौज UAE की सुरक्षा भी करेगी।

Muhammad Bin Salman- Saudi Aramco facility

एक अमरीकी सैन्य अधिकारी ने बताता कि सऊदी अरामको पर जिस तरह का हमला हुआ, वैसा हमला कोई एक सिस्टम रोक नहीं सकता…इसके लिए किस सिस्टम्स का इस्तेमाल होगा। आपको बता दें कि सऊदी अरब और ईरान कट्टर विरोधी माने जाते हैं वहीं पिछले कुछ समय में अमरीका और ईरान के संबंध बिगड़े हैं। सऊदी अरब, UAE और अमरीका मित्र राष्ट्र माने जाते हैं।

आपको बता दें कि 14 सितम्बर को हुए इस हमले के बाद अमरीका और सऊदी अरब ने जहाँ ये कहा है कि इस हमले को ईरान ने किया है वहीँ ईरान ने इसको ग़लत बताया है. इस हमले की ज़िम्मेदारी यमन के हौथी गुट ने ली है. हौथी गुट को ईरान का समर्थन प्राप्त है परन्तु अमरीका का दावा है कि इस बार हमला ख़ुद ईरान ने किया है.

उल्लेखनीय है कि शनिवार के रोज़ हुए इस हमले के बाद सऊदी तेल उत्पादन में कमी आ गई है. बताया जा रहा है कि दुबारा उत्पादन का ये लेवल इस महीने के अंत तक आ जाएगा. UAE और सऊदी अरब अमरीका के क़रीबी दोस्त माने जाते हैं. ऐसे में संयुक्त राज्य अमरीका कह रहा है कि वो अपने मित्रों के पूरी तरह से साथ है.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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