UAE के इस फ़ैसले से सऊदी अरब को लगा झ’टका, अब यु’द्ध की…

दुनिया

इस समय पश्चिमी एशिया की स्थिति कुछ इस तरह की है कि इसको समझना मुश्किल हो गया है. क्षेत्र के कुछ देशों में अशांति की स्थिति है. सीरिया और ईराक़ में यु’द्ध के हालात हैं और कुछ ऐसे ही हालात हैं यमन में. यमन में सऊदी अरब हौथी वि’द्रोहियों के ख़ि’लाफ़ वहाँ की सरकार के साथ ख’ड़ा हुआ है. सऊदी अरब के साथ संयुक्त अरब अमीरात भी था लेकिन अब दोनों देशों का गठबंधन टू’ट गया है.

अब जो हालात बन रहे हैं उससे लगता है कि एक और मोर्चा यमन में खुलना तय है. अब तक गठबंधन में शामिल हो कर हौथी विद्रो’हियों का सामना कर रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अब आमने सामने आ रहे हैं. हौथी वि’द्रोहियों से ल’ड़ रहे सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना में संयुक्त अरब अमीरात के सैनिक बड़ी संख्या में हैं लेकिन अब उसने अपने सैनिकों की वापसी शुरू कर दी है.

समस्या इतनी भी नहीं है बल्कि संयुक्त अरब अमीरात अब यमन की सरकार के सामने चुनौती पेश कर रहा है. यमन में संघर्षरत सरकार के गृह मंत्री ने दक्षिणी अलगा’ववादी नेता पर “बग़ा’वत भ’ड़काने” का आरोप लगाया है. ये अलगाव’वादी ता’कतें यमन की सेना से अदन में राष्ट्रपति के महल के पास ल’ड़ रही है. इसके साथ ही यह चिं’ता भी पैदा हो गई है कि क्या पहले से ही गृहयु’द्ध झेल रहे यमन में एक नया मोर्चा खुलने जा रहा है.

गृह मंत्री अहमद अल माइसारी ने अलगाववादी नेता हानी बेन ब्राइक के सम’र्थकों से कहा है कि वे सरकार को उखाड़ने की उनकी मांग अनसुनी कर दें. माइसारी का कहना है कि ब्राइक का लक्ष्य केवल यु’द्ध का ख़तरा पैदा करना और हूथी विद्रो’हियों के खिला’फ चल रही ल’ड़ाई को कमजोर करना है. बीते कई साल से यमन गृहयु’द्ध में घिरा है.

यहां सऊदी अरब के नेतृत्व में एक गठबंधन सेना ईरान सम’र्थित हूथी विद्रो’हियों से 2015 से ही ल’ड़ रही है. यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता वाली सरकार तो अब बस अदन के कुछ इलाकों में ही सिमट गई है. अब तक इस ल’ड़ाई में 10 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और देश एक एक तरह से भुखमरी के मुहाने पर पहुंच गया है.

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