क’ट्टर दु’श्मन मु’स्लिम देशों के साथ आने की संभा’वना, ख़’त्म होगा यु’द्ध

August 12, 2019 by No Comments

इस समय वैश्विक सियासत एकदम अलग दिशा में जा रही है. अमरीका के साथी उसे छो’ड़ रहे हैं और कुछ साथियों को अमरीका ख़ुद ही छो’ड़ रहा है वहीँ कुछ ऐसे भी देश हैं जो पहले अमरीका के विरोधी थे लेकिन अब कुछ नज़दीकियाँ बन रही हैं. ईरान और सऊदी अरब के स’म्बन्ध भी लम्बे समय से ख़’राब माने जाते रहे हैं. ऐसा माना जाता है कि सऊदी अरब अमरीका का साथी है और ईरान रूस के क़रीब है.

परन्तु अब ख़बर है कि सऊदी अरब ईरान से बातचीत करना चाहता है. मीडिया हाउस से आ रही ख़बरों की मानें तो ऐसा लगता है कि सऊदी अरब फ़ारस की खाड़ी में समुद्री यातायात की सुरक्षा अपनी तैनाती के बारे में ईरान से गंभीर वार्ता शुरू करने का इच्छुक है। समाचारपत्र रायुल यौम ने अपनी एक समीक्षा में लिखा है कि ईरान के निकटवर्ती सूत्रों का कहना है कि तेहरान के संबंध में सऊदी अरब की नीति में बड़ा परिवर्तन आया है।

अलबत्ता यह नीति केवल समुद्री यातायात की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि ऐसे अनेक मामलों पर भी लागू होगी जिनका महत्व समुद्री यातायात से कम नहीं है। अगर ईरान व सऊदी अरब के बीच बातचीत शुरू होती है तो ऐसा मुमकिन है कि यमन को लेकर भी बातचीत हो और इस मुद्दे का भी हल निकले. ऐसा लगता है कि उसने एक गुप्त चैनल के माध्यम से तेहरान तक यह संदेश पहुंचा दिया है कि इस यु’द्ध का अंत इस तरह हो कि रियाज़ को पराजित न माना जाए.

यह रियाज़ की कड़ी शर्त है और वह इसे ईरान के साथ वार्ता के लिए इसे एक मूल बिंदु मानता है। ऐसा माना जा रहा है कि संयुक्त अरब एमिरात ने जिस तरह से यमन में अपना स्टैंड बदला है उसके बाद समीकरण बदल गए हैं. अलग-अलग रिपोर्ट में ये दावा किया जा रहा है कि यमन में अब सऊदी अरब के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है. इस समय संयुक्त अरब एमिरात और सऊदी अरब के बीच भी’षण वि’वाद है.

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सारे मामले पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बारीकी से निगाह है. वो लगातार इस कोशिश में हैं कि यमन को लेकर सऊदी अरब और ईरान में समझौता हो जाए. सऊदी अरब इस समय बैकफुट पर है और यही वजह है कि वो इस कोशिश में है कि किसी प्रकार की संधि हो जाए.

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