नए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट ने उठाया बड़ा क़दम, मोदी सरकार को लगा झटका..

January 11, 2021 by No Comments

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज विवादित कृषि क़ानूनों के मुद्दे को लेकर डाली गई एक याचिका को सुना. देश की सर्वोच्च अदालत ने इस क़ानून के इस्तेमाल पर फ़िलहाल रोक लगा दी है लेकिन क़ानूनों को रद्द नहीं किया है. अदालत ने कहा है कि वो क़ानून पर रोक नहीं लगा रही है, बस अमल पर रोक लगा रही है.

कृषि कानून और किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई जिसमें CJI एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार इस मामले को हैंडल कर रही है, हम उससे निराश है. कोर्ट ने कहा, क्या कुछ समय के लिए कृषि कानूनों को लागू करने से रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार इन कानूनों को पहले होल्ड पर रखे, नहीं तो सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों पर रोक लगा देगा.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, ’26 जनवरी को किसान गणतंत्र दिवस परेड पर 2 हजार ट्रैक्टर्स की रैली करने की प्लानिंग कर रहे हैं, ताकि समारोह को डैमेज कर सके.’ इसपर सीजेआई ने पूछा- ‘भला किसान ऐसा क्यों करना चाहेंगे? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 15 जनवरी को नौंवे दौर की बातचीत होनी हैं, देखते है क्या हल निकलता है, इसपर CJI ने कहा सरकार इस मामले को सही तरीके से हैंडल नही कर रही और हम नाखुश है।

चीफ जस्टिस के सामने सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मिसालें हैं कि अदालतें कानून नहीं बना सकती हैं. अदालत तब तक कानून नहीं बना सकती जब तक कि यह नहीं पता चलता कि कानून विधायी क्षमता के बिना पारित किया गया है और कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.

चीफ जस्टिस जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि कुछ लोगों ने आत्महत्या की है, बूढ़े और महिलाएं आंदोलन का हिस्सा हैं. ये क्या हो रहा है? हमारे पास एक भी याचिका दायर नहीं की गई है जिसमें कहा जाए कि कृषि कानून अच्छे हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने अटॉर्नी जनरल से कहा, हमें यह कहते हुए खेद है कि आप, भारत के संघ के रूप में, समस्या को हल करने में सक्षम नहीं हैं. सरकार की ओर से वकील हरीश साल्वे ने कहा कि अगर कानून पर रोक लगती है तो किसानों को विरोध प्रदर्शन बंद करने दें.

इसके जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा कि सब कुछ एक आदेश के साथ प्राप्त नहीं किया जा सकता है. समिति के समक्ष किसान जाएंगे. कोर्ट एक आदेश पारित नहीं करेगा कि नागरिकों को विरोध नहीं करना चाहिए. कोर्ट ने मामले को सुलझाने के लिए एक समीति गठित करने का दिया प्रस्ताव दिया है, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा की अगर कुछ गलत हुआ तो हम सभी जिम्मेदार होंगे

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