किसी तरह ख़ुद बन पाए CM लेकिन भ्रष्ट मेवालाल चौधरी को साथ लेना नहीं भूले नीतीश, तेजस्वी यादव ने..

November 18, 2020 by No Comments

पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कुछ सालों में एक ऐसे नेता के बतौर जाने जाते हैं जिनकी ज़बान की कोई ख़ास वैल्यू नहीं है. लम्बे समय तक भाजपा के साथ गठबंधन में रहने वाले नीतीश ने तब भाजपा का साथ छोड़ दिया जब भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया. फिर उन्होंने लालू यादव के साथ महागठबंधन कर लिया और बिहार में लालू की पॉपुलैरिटी ने महागठबंधन को दो-तिहाई बहुमत दिलाया. सेक्युलर ताक़तें जब मज़बूत हो रहीं थीं तभी नीतीश कुमार ने एक और गेम खेल दिया और महागठबंधन छोड़कर भाजपा के दरवाज़े पर पहुँच गए.

राजनीतिक विश्लेषक उनकी इस पहल को उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ग़लती मानते हैं. इसके बाद वो मुख्यमंत्री बन गए लेकिन राज्य में उनकी साख लगभग ख़त्म हो गई. उनके विरोधी उन्हें पलटूराम कहने लगे. नीतीश ने दावा किया कि तेजस्वी यादव के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप थे, इसलिए उनको महागठबंधन छोड़ना पड़ा. ध्यान देने की बात ये है कि तेजस्वी के ऊपर जो आरोप लगे हैं वो एक ऐसे मामले में लगे हैं जब वो 13 साल के थे. इसका अर्थ है कि एक नाबालिग़ लड़के पर ऐसे आरोप का कोई ख़ास आधार नहीं था. तेजस्वी के ऊपर तो चार्जशीट भी नहीं आयी थी.

अब इस साल के बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं और NDA किसी तरह सरकार बनाने में कामयाब हो गया है. जदयू की स्थिति जीते हुए गठबंधन में होने के बाद भी राज्य की तीसरे नम्बर की पार्टी की हो गई है. राजद समेत महागठबंधन की अन्य पार्टियों ने मतगणना में धाँधली के आरोप लगाये हैं और कहा है कि पोस्टल बैलेट में धाँधली कर जदयू और भाजपा को कई सीटों पर जीत गिफ्ट की गई. जो भी हो लेकिन नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन तो गए ही हैं. विवाद लेकिन यहाँ भी उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है.

एक समय तेजस्वी यादव पर लगे कमज़ोर आरोपों की आड़ में महागठबंधन छोड़ने वाले नीतीश कुमार ने अपनी सरकार में जदयू कोटे से डॉक्टर मेवालाल चौधरी को मंत्री बना दिया है. मेवालाल के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में जमकर मेवा खाया है. इतना ही नहीं उन्हें शिक्षा मंत्रालय दिया गया है. नीतीश कुमार के इस फ़ैसले पर राजद ने उन्हें बुरी तरह घेर लिया है. तेजस्वी यादव ने इस सिलसिले में एक ट्वीट किया है,”मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति और भवन निर्माण में भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में IPC 409,420,467, 468,471 और 120B के तहत आरोपी मेवालाल चौधरी को शिक्षा मंत्री बनाकर क्या भ्रष्टाचार करने का ईनाम एवं लूटने की खुली छूट प्रदान की है?”

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