तिरुवनंतपुरम: केरल में एक चरण में 6 अप्रैल को विधानसभा चुना’व हुआ। केरल की राजनीति में यह इतिहास रहा है कि यहां हर पांच वर्षों में सरकार बदलती है। लेकिन इस बार यह रिकॉड टूट’ता हुआ नज़र आ रहा है। केरल में लेफ्ट ड्रेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार है। और इस बार भी एलडीएफ केरल की सत्ता में वाप’सी करते हुए दिख रही है।

चार दशकों में ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब केरल में कोई सत्तारूढ़ पार्टी दोबारा सत्ता में वापसी कर रही हो। केरल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों के शुरुआती रुझानों में 89 सीटों पर लेफ्ट दलों का गठजोड़ एलडीएफ आगे है। केरल में बहुम’त का आंकड़ा 71 सीटों का है जिसे एलडीएफ ने पा’र कर लिया है। तो वहीं, कांग्रेस के गठबंध’न वाली यूडीएफ 46 सीटों पर आगे दिख रहा है।

धर्मादम सीट से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन बहुत आगे चल रहे हैं। केरल में बीजेपी को कोई खास कामयाबी नहीं मिलती नजर आ रही है लेकिन उसके पलक्कड़ से उम्मीदवार और मेट्रोमैन नाम से मशहूर ई श्रीधरन 2 हज़ार से ज्यादा वोटों से बढ़त बनाए हुए हैं। मंजेश्वरम सीट से बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने बढ़त बनाये हुएं हैं।

नेमोम सीट से बीजेपी के कुम्मानम राजशेखरन आगे चल रहे हैं। वहीं, पाला सीट से यूडीएफ के मणि कप्पन 7211 वोटों से बढ़त बनाये हए हैं। जबकि थोडुपुझा से पार्टी के पीजे जोसेफ ने 2114 मतों से आगे चल रहे हैं। पोस्टल बैलेट में पलक्कड सीट से मेट्रो मैन ई श्रीधरन ने बढ़त बना रखी है। मंजेश्वरम सीट से बीजेपी अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने पोस्टल बैलेट में बढ़त बना रखी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी पुथुपाली सीट से आगे है। कन्याकुमारी लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस आगे चल रही है। केरल में सुबह 8 बजे 633 मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती शुरू हुई। केरल में इस बार 2.74 करोड़ मतदाताओं में से 2 करोड़ से ज्यादा वोटरों ने इस बार मतदान किया।

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