कृषि क़ानून को लेकर मायावती का बड़ा बयान,’किसानों की माँग को..’

January 12, 2021 by No Comments

कृषि आंदोलन के खि’लाफ दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन के बीच बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में ये उठाना जरूरी है। मायावती ने किसानों व केंद्र सरकार के बीच अब तक नौ दौर की वार्ता के बेनतीजा रहने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सरकार को नए कृषि कानूनों को वापस लेने की किसानों की मांग को स्वीकार करके इस समस्या का जल्दी ही समाधान करना चाहिए।

मायावती ने शनिवार को ट्विट के जरिए इस बात की जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि काफी समय से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसानों व केंद्र सरकार के बीच वार्ता कल एक बार फिर से नाकाम रही, जो चिंता की बात है। केंद्र सरकार को चाहिए कि इस मुद्दे को गंभीरता से ले और जरूरी कदम उठाए।

आपको बता दें कि कृषि कानून और किसान आंदोलन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान CJI एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि जिस तरह से सरकार इस मामले को हैंडल कर रही है, हम उससे निराश है. कोर्ट ने कहा, क्या कुछ समय के लिए कृषि कानूनों को लागू करने से रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि केंद्र सरकार इन कानूनों को पहले होल्ड पर रखे, नहीं तो सुप्रीम कोर्ट इन कानूनों पर रोक लगा देगा.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, ’26 जनवरी को किसान गणतंत्र दिवस परेड पर 2 हजार ट्रैक्टर्स की रैली करने की प्लानिंग कर रहे हैं, ताकि समारोह को डैमेज कर सके.’ इसपर सीजेआई ने पूछा- ‘भला किसान ऐसा क्यों करना चाहेंगे? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 15 जनवरी को नौंवे दौर की बातचीत होनी हैं, देखते है क्या हल निकलता है, इसपर CJI ने कहा सरकार इस मामले को सही तरीके से हैंडल नही कर रही और हम नाख़ुश है।

चीफ जस्टिस के सामने सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की मिसालें हैं कि अदालतें कानून नहीं बना सकती हैं. अदालत तब तक कानून नहीं बना सकती जब तक कि यह नहीं पता चलता कि कानून विधायी क्षमता के बिना पारित किया गया है और कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है.

चीफ जस्टिस जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि कुछ लोगों ने आत्मह’त्या की है, बूढ़े और महिलाएं आंदोलन का हिस्सा हैं. ये क्या हो रहा है? हमारे पास एक भी याचिका दायर नहीं की गई है जिसमें कहा जाए कि कृषि कानून अच्छे हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने अटॉर्नी जनरल से कहा, हमें यह कहते हुए खेद है कि आप, भारत के संघ के रूप में, समस्या को हल करने में सक्षम नहीं है.

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