कर्णाटक कांग्रेस में नया नाटक, चुनाव के दो साल पहले ही पार्टी में ये ब’वाल..

June 23, 2021 by No Comments

बेंगलुरु: कर्नाटक में राजनैतिक नाटक आम है। रोज़ाना किसी न किसी दल में कोई न कोई नाटक चलता ही रहता है। 2018 के विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर राज्यपाल ने (कांग्रेस +जेडीएस=142) गठबंधन दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करके बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था।

येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले डाली लेकिन कर्नाटक का नाटक शुरू होना बाकी था। येदियुरप्पा फ्लोर टेस्ट पास नही कर पाए और इस्तीफा दे दिया। अब सरकार बनाने की बारी थी कांग्रेस जेडीएस गठबंधन की। गठबंधन ने बहुमत सिद्ध कर दिया और एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनते हैं। कुछ दिनों के बाद पुनः एक नया नाटक कर्नाटक में शुरू होता है जिसका मंचन बीजेपी के मंच पर किया जाना था।

येदियुरप्पा बहुमत साबित न कर पाने का मलाल भूल नही पाए थे इसका बदला लेने के लिए उन्होंने पर्दे के पीछे से ही खेल खेलना शुरू कर दिया। दिन रात मोल भाव करके गठबंधन के कई विधायकों की बोली लगाई जा चुकी थी इस बात से अनजान एचडी कुमारस्वामी की सरकार चन्दन की महक में डूब कर सत्ता का रस ले रही थी। महीना था जुलाई का और साल था 2019 का कर्नाटक की सियासत अपनी एक नई इबादत लिख चुकी थी। गठबंधन की सरकार का सूरज अस्त हो चुका था।

मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की कुर्सी के चारों पाए भर’भराकर गि’र चुके थे। येदियुरप्पा चौथी बार शपथ लेने के लिए अपने आवास से निकल चुके थे। कर्नाटक का यह नाटक अभी तक जारी है जो अब एक नई पटकथा के साथ पेश किया जाएगा। अभी कर्नाटक के विधानसभा चुनाव होने में 2 साल से भी ज्यादा का समय बचा है लेकिन कांग्रेस में कुछ विधायक अभी से ही सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की मांग करने लगे हैं। ये मांग तब से जोर पकड़ी है जब से कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार राहुल गांधी से मिलने दिल्ली गए हैं।

शिवकुमार संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए दिल्ली आये हुए थे। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि कुक लोग पार्टी के नेतृत्व के बारे में बयानबाजी करने के आदी हो गए हैं। मैं उन्हें इस तरह की टिप्पणियों से बचने की चेतावनी देता हूँ। केंद्रीय नेतृत्व व विधायक सही समय पर निर्णय लेंगे। दूसरी तरफ शिवकुमार के करीबी लोगों ने कहा है कि इस तरह के बयान देना श’रारत है। चुनाव के लिए अभी 2 साल का समय है।

अभी से इस बारे में बात करना ठीक नही है। साल 2023 के संभावित विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया को सीएम पद का चेहरा बनाने की बी. जेड. जमीर, अहमद खान और राघवेंद्र हिंतल से शुरू हुई। अब काम्पली से विधायक जे. एन. गणेश और हगरीबोम्मनहल्ली से विधायक भीमा नायक ने भी यही मांग रख दी है। वहीं दूसरी तरफ़ सिद्धरमैया ने कहा कि यह उनके निजी विचार हैं न कि पार्टी का विचार है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मैने कभी भी हिंतल को पक्ष में बयान देने के लिए नहीं कहा। सिद्धरमैया ने बेल्लारी में  कहा, ‘क्या मैंने कभी कहा कि मैं मुख्यमंत्री बनूंगा या पार्टी ने ऐसा निर्णय किया है? नहीं। इस तरह की चर्चा पार्टी में नहीं हुई है। इसलिए इस तरह के मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है और यह चर्चा का मुद्दा नहीं है। ऐसे में आगामी आने वाले दिनों में देखना है कि कर्नाटक का यह नया नाटक राजनीति का कौन सा गुल खिलाता है।

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