कार्ल मार्क्स ने कहा था जब किसी के साथ अन्याय, भेदभाव या ग़लत हो रहा है तो संगठित होकर विरोध करें…

May 5, 2018 by No Comments

वैज्ञानिक समाजवाद के प्रणेता दार्शनिक, अर्थशास्त्री, समाजविज्ञानी और पत्रकार कार्ल मार्क्स की आज 200वीं जयंती है। उनका जन्म 5 मई 1818 को जर्मनी के ट्रियर शहर में हुआ था। कार्ल मार्क्स ने दुनिया को समाज और आर्थिक गतिविधियों के बारे में अपने विचारों से आंदोलित कर दिया। उनके विचारों से प्रभावित हो कर कई क्रांतियों की नींव पड़ी।

समाज में एक मजबूत सोशल इंजीनियरिंग उनकी विचारों से ही प्रेरित मानी जाती है. साम्राज्यवाद, आज़ादी और सामूहिक हत्याओं से उनके सिद्धांत जुड़ने के बाद उन्हें विभाजनकारी चेहरे के रूप में देखा जाने लगा। लेकिन कार्ल मार्क्स का एक दूसरा चेहरा भी है और वो है एक भावनात्मक इंसान का. दुनिया की बेहतरी में उनके विचारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

कार्ल मार्क्स ने बताया था कि कैसे एक पूंजीवादी समाज में लोगों को जीने के लिए श्रम बेचना उसकी मजबूरी बना दिया जाएगा। मार्क्स के अनुसार अधिकांश समय आपको आपकी मेहनत के हिसाब से पैसे नहीं दिए जाते थे और आपका शोषण किया जाता था। मार्क्स चाहते थे कि हमारी ज़िंदगी पर हमारा खुद का अधिकार हो, हमारा जीना सबसे ऊपर हो, वो चाहते थे कि हम आज़ाद हो और हमारे अंदर सृजनात्मक क्षमता का विकास हो।
कार्ल मार्क्स ताउम्र कामकाजी तबके की आवाज बुलंद करते रहे. इसके कारण उन्हें पूंजीपती वर्गों का काफी विरोध भी सहना पड़ा। साल 1864 में लंदन में ‘अंतरराष्ट्रीय मजदूर संघ’ की स्थापना में मार्क्स ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने लोगों को बताया था कि आपका काम आपको खुशी देता है जब आपको अपने मन का काम करने को मिलता है।

जो हम जीवन में चाहते हैं, या फिर तय करते हैं, उसमें रचनात्मक मौके मिले और हम उसका प्रदर्शन कर सके तो यह हमारे लिए अच्छा होता है। लेकिन जब आप दुखी करने वाला काम करते हैं, जहां आपका मन नहीं लगता है तो आप निराश होते हैं। इसके पीछे उनका तर्क था कि हम अपना अधिकांश समय काम करने में खर्च करते हैं, इसलिए यह ज़रूरी है कि उस काम से हमें खुशी मिले।

कार्ल मार्क्स कहते थे कि समाज में अगर आप महसूस कर रहे हैं कि किसी के साथ अन्याय, भेदभाव या ग़लत हो रहा है, आप उसके ख़िलाफ़ विरोध करें। आप संगठित हों, आप प्रदर्शन करें और उस परिवर्तन को रोकने के लिए संघर्ष करें।

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