बेंगलुरु. कर्नाटक (Karnataka) में भाजपा सरकार है लेकिन इस समय इसमें कुछ हलचल सी दिख रही है. राज्य के बहुत से भाजपा नेता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री बीएस येदयुरप्पा को हटाकर किसी और को CM बनाया जाए. हालाँकि येदयुरप्पा का कैम्प भी कोई कमज़ोर नहीं है. ऐसे में जब ये सवाल उठता है तो कहीं न कहीं येदयुरप्पा अपनी गणित सही करके कुर्सी बचा ही लेते हैं.

इस सिलसिले में जब सवाल येदयुरप्पा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह तब तक शीर्ष पद पर बने रहेंगे जब तक भाजपा (BJP) आलाकमान को उन पर भरोसा है. मुख्यमंत्री ने कहा, वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि राज्य भाजपा में उनकी जगह लेने के लिए कोई वैकल्पिक नेता नहीं है, इसलिए जिस दिन पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से आदेश आएगा, वह अपना पद छोड़ देंगे.

येडियुरप्पा से जब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा “…जब तक दिल्ली आलाकमान को मुझ पर भरोसा है, मैं मुख्यमंत्री बना रहूंगा. जिस दिन वे कहेंगे कि वे मुझे नहीं चाहते, मैं इस्तीफा दे दूंगा और राज्य के विकास के लिए दिन-रात काम करूंगा.’ यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं किसी भ्रम में नहीं हूं. उन्होंने (आलाकमान) ने मुझे एक मौका दिया है, मैं अपनी ताकत से आगे बढ़कर इस मौके का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा हूं. बाकी आलाकमान पर छोड़ दिया है.’

वैकल्पिक नेतृत्व के सवाल के जवाब में येडियुरप्पा ने कहा, ‘मैं किसी की आलोचना नहीं करूंगा. मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि कोई वैकल्पिक व्यक्ति नहीं है. राज्य और देश में हमेशा वैकल्पिक व्यक्ति होंगे, इसलिए मैं जीता. मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि कर्नाटक में कोई वैकल्पिक व्यक्ति नहीं है, लेकिन जब तक आलाकमान को मुझ पर भरोसा है, तब तक मैं मुख्यमंत्री के रूप में बना रहूंगा. यह संभवत: पहली बार है जब 78 वर्षीय लिंगायत नेता ने नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर विस्तार से बात की है.

पिछले कुछ समय से ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा को बदलने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर कुछ कदम उठाए जा रहे है. कुछ मंत्रियों और विधायकों ने पहली बार इस तरह के कदमों को खुले तौर पर स्वीकार किया, ताकि कर्नाटक भाजपा के मजबूत नेता को हटाने को लेकर दबाव बनाया जा सके.राज्य के पर्यटन मंत्री सीपी योगेश्वर और भाजपा हुबली-धारवाड़ (पश्चिम) के विधायक अरविंद बेलाड की हाल की दिल्ली यात्रा कथित तौर पर आलाकमान से मिलने और येडियुरप्पा की कार्यप्रणाली के खिलाफ कुछ विधायकों की भावनाओं को व्यक्त करने और उनसे मुख्यमंत्री पर लगाम लगाने का अनुरोध करने के इरादे से हुई थी.

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