काबुल: काबुल एअरपोर्ट पर त’बाही का मंज़र नज़र आ रहा है. एअरपोर्ट पर अमरीका और दूसरे पश्चिमी देश अपने नागरिकों और कई अन्य लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर ले जाने की कोशिशों में लगे हैं. फ़िलहाल ये एअरपोर्ट अमरीकी सेना के क़ब्ज़े में है लेकिन एअरपोर्ट पर इस हद तक भीड़ का मंज़र है कि अमरीकी सेना भी भीड़ क़ाबू नहीं कर पा रही है.


एअरपोर्ट से जो तस्वीरें आ रही हैं वे बहुत ही चिंताजनक हैं. एक वीडियो में लोगों का एक बड़ा समूह अमरीकी सेना के विमान में चढ़ने की कोशिश कर रहा है. एक अन्य वीडियो में एक अमरीकी विमान जो रन-वे पर दौड़ रहा है और टेक-ऑफ़ करने जा रहा है, उसके बाहर लोग लटके हुए हैं, पहियों की जगह में भी लोग चढ़े हुए हैं. इसके अतिरिक्त दो अन्य वीडियो ऐसे आए हैं जिनको देखकर यक़ीन करना मुश्किल है.

इन वीडियोस में देखा जा सकता है कि कम से कम तीन लोग जो प्लेन पर लटके हुए थे, टेक ऑफ़ हो जाने के बाद गिर गए हैं. इन तीनों की मौ’त की ख़बर है. इसके अलावा पाँच अन्य लोगों की मौ’त की ख़बर भी है. उल्लेखनीय है कि सुबह अमरीकी फ़ौज ने हवाई फायरिंग की थी ताकि भीड़ पर क़ाबू पाया जा सके.


इस बीच बड़ी ख़बर आ रही है कि अमरीका ने अपना ईवैकुएशन ऑपरेशन फ़िलहाल रोक दिया है. काबुल एअरपोर्ट को क्लियर करने के बाद ये ऑपरेशन फिर से शुरू किया जाएगा. एक अन्य ख़बर उज़्बेकिस्तान से आ रही है जिसके मुताबिक़ अफ़ग़ान मिलिट्री का एक प्लेन उज़्बेकिस्तान में क्रेश हो गया है. एक तरफ़ जहाँ पश्चिम देश एम्बैसी से स्टाफ और अपने नागरिकों को काबुल से बाहर निकालने में लगे हैं वहीं दूसरी ओर चीन और रूस ऐसा कोई काम नहीं कर रहे हैं.

चीन अपने नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान से निकालने को लेकर कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखा रहा है. चीन ने अपनी एम्बसी के लोगों को भी एम्बसी में ही रहने की सलाह दी है और कहा है कि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और बाहर न निकलें. हालाँकि चीन की तरफ़ से साफ़ है कि वह अभी इस तरह की कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाने वाला है.


इस बीच एऍफ़पी के सौजन्य से ख़बर है कि चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुन्यिंग ने कहा है कि चीन चाहता है कि अफ़ग़ान लोग अपना भविष्य ख़ुद तय करें. साथ ही चीन ने ये भी कहा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के साथ दोस्ताना सम्बन्ध रखना चाहता है.

चीन के बयान से लगता है कि वो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता दे सकता है. जिन देशों ने अब तक अपनी काबुल एम्बसी को बंद नहीं किया है उनमें चीन के अलावा रूस, भारत और पाकिस्तान का नाम भी शामिल है.

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