काबुल एअरपोर्ट पर अमरीका द्वारा हवाई फा’यरिंग करने के बाद ख़बर है कि पाँच लोगों की जा’न चली गई है. अभी तक ये साफ़ नहीं है कि इन लोगों की मौत गोली लगने से हुई है या फिर अ’फरा-तफरी के बीच मची भगदड़ से हुई है. काबुल एयरस्पेस कमर्शियल फ्लाइट्स के लिए बंद कर दिया गया है. वहीं पश्चिमी देशों की सरकारें अपने लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर ले जाने के लिए काबुल एअरपोर्ट से ईवैकुएशन प्रोसेस चला रही हैं.

दूसरी ओर ख़बर है कि चीन अपने नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान से निकालने को लेकर कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखा रहा है. चीन ने अपनी एम्बसी के लोगों को भी एम्बसी में ही रहने की सलाह दी है और कहा है कि सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और बाहर न निकलें. हालाँकि चीन की तरफ़ से साफ़ है कि वह अभी इस तरह की कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखाने वाला है.

विश्लेषकों की मानें तो ये कूटनीतिक तौर पर तालिबान के पक्ष में जा सकता है. जानकार मानते हैं कि चीन और तालिबान ने आपस में बातचीत कर ली है और संभव है कि जल्द ही चीन तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के रूप में मान्यता दे दे. ऐसा होने पर तालिबान के लिए वैश्विक स्तर पर एक बड़ा साथी मिल जाएगा. चीन के अलावा रूस ने भी अपने नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के लिए नहीं कहा है.


चीन और रूस उन 65 देशों के जॉइंट स्टेटमेंट का भी हिस्सा नहीं हैं जिनमें विदेशी नागरिकों और वे अफ़ग़ान जो देश छोड़ना चाहते हैं उनको सुरक्षित अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकाला जाए. इससे साफ़ है कि तालिबान को रूस का भी समर्थन मिल सकता है. चीन की बात करें तो साउथ एशियाई एक्सपर्ट लिन मिन्वांग कहते हैं कि कोई अपने देश पर कैसे राज करता है ये उसका मामला है लेकिन इससे चीन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए. रूस की ओर से ख़बर है कि मंगलवार के रोज़ रूसी एम्बैसडर तालिबान से मुलाक़ात करेंगे.

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