“कभी हाँ, कभी ना”, PM मोदी ने कहा था ‘एक भी डिटेंश’न सेंटर नहीं है’, अमित शाह ने ये कहा..

नई दिल्ली: कल समाचार एजेंसी ANI को दिए अपने इंटरव्यू में गृह मंत्री अमित शाह ने CAA और NRC पर जनता के ग़ुस्से को शांत करने की उम्मीद से ये बताया कि NRC को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही है. परन्तु कल ही सरकार ने NPR को लेकर आदेश जारी कर दिया था. विपक्ष और सामाजिक लोगों का दावा है कि NPR के ज़रिए सरकार NRC करेगी. ये बात विपक्ष ही नहीं कह रहा है बल्कि ख़ुद केंद्र सरकार लगातार इस बात को कहती रही है.

सरकार एक समय बड़े जोश से ये कहती थी कि एनपीआर पहला क़दम है और NRC उसके बाद उसी की मदद से बनेगा. 8 जुलाई 2014 को तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजीजू ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद के सवाल के जवाब में कहा था कि एनपीआर की समीक्षा की जा रही है और इसके ज़रिए नागरिकता की स्थिति का वेरिफ़िकेशन किया जाएगा. 15 जुलाई को दोबारा लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान रिजीजू ने अपने इस बयान को दोहराया था. खुद गृहमंत्री अमित शाह राज्यसभा में कह चुके हैं कि NPR एनआरसी की दिशा में पहला क़दम है.

कल केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि NPR और NRC में कोई सम्बन्ध नहीं है लेकिन सरकार पहले ये कह चुकी है कि वो NPR डाटा की मदद से NRC बनाएगी. जावड़ेकर ने अपने बयान में कहा कि NPR में किसी को अपना डॉक्यूमेंट दिखाने की ज़रूरत नहीं है. ये बात तो सही है लेकिन इसमें जो सवाल जवाब होंगे उसके बाद NRC की प्रक्रिया में सरकार को कुछ करने की ज़रूरत नहीं होगी क्यूँकी जानकारी तो पहले ही आ गई.

केंद्र सरकार कहती है कि जब UPA सरकार थी तब भी NPR हुआ था लेकिन जानकार कहते हैं कि UPA सरकार ने कभी NPR का इस्तेमाल NRC में करने की न तो बात की थी और न ही उस सरकार में इस तरह की कोई भी कोशिश की गई. कल अपने इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि जो डिटेंशन सेंटर हैं वो कोई स्पेशल नहीं हैं और वो होते ही हैं. शाह का बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से अलग है जिसमें मोदी ने कहा था कि देश में कहीं भी कोई भी डिटेंशन सेंटर नहीं है.

जानकार मान रहे हैं कि नागरिकता संशोधन विधेयक और NRC को लेकर जिस स्तर का विरोध हो रहा है उससे सरकार को समझ में नहीं आ रहा कि वो क्या करे. सरकार किसी तरह से इस ग़ुस्से को कम तो करना चाहती है लेकिन डायलॉग की बात नहीं कर रही. सरकार शांति की बात करती है लेकिन पुलिस बेतरतीबी से लोगों पर लाठी चला रही है. कभी सरकार कहती है कि NRC होके रहेगा कभी कहती है हमने तो कभी बात ही नहीं की. प्रधानमंत्री कहते हैं डिटेंशन सेंटर नहीं है, गृह मंत्री कहते हैं कि उस प्रकार के नहीं हैं जैसे मीडिया दिखा रहा है. सरकार को इन उलझनों से निकल कर बातचीत के रास्ते पर चलना चाहिए.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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