दोस्तों आज हम आप को ऐसी बातें बताने जा रहे है जो मियां बीवी के बीच की हैं.दोस्तों एक मर्द अपने घर को चलाने के लिए सोचता हैं कि बेहतर से बेहतर काम करों जिससे मेरे बीवी बच्चे खुश रहे और उनकी तमाम ज़रूरतों को हम पूरा कर सके,इसी सिलसिले में आपको कुछ बताने जा रहा हों.आइये अब बताते हैं जब मर्द अपनी पूरी तनख्वाह अपनी बीवी को दे देता हैं तो क्या होता हैं.दोस्तों इस्लाम में मियां बीवी के रिश्ते को सबसे बेहतरीन और सबसे ऊपर रख्खा गया हैं.

हमारे नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने उन शौहर के बारे में क्या कहा है? जो अपनी पूरी तनख्वाह अपनी बीवी को दे देता हैं,पैसे को लेकर कई बार शौहर और बीवी के बीच में नाइत्तेफ़ाक़ी हो जाती ही,हर बीवी ये जानना चाहती हैं की मेरा शौहर कितना कमाता हैं और इस बात को शौहर नहीं बताता हैं जिससे आपस में रिश्ता ख़राब,लड़ाई-झगडे होने लगते हैं.नबी ए करीम ने फ़रमाया है कि अगर बीवी अपने शौहर की तमाम बातें मानती है।अगर घर का खर्च सही तरीके से चलाती है तो इसमें कोई बात नहीं है कि शौहर अपनी पूरी तनख्वाह अपने बीवी के हाथ में दे दे। लेकिन अगर बीवी फालतू का खर्च करती है तो शौहर को बिलकुल ऐसा नहीं करना चाहिए। इससे घर में परेशानी आएगी.

अगर किसी का शौहर अपनी बीवी को पूरी तनख्वाह लाकर देता है। तो यह उसकी मोहब्बत है। उस मोहब्बत के बदले बीवी शौहर को उसी तरीके से जवाब देना चाहिए। रुपयों का गलत इस्तेमाल न करे। बल्कि ज़रूरत के लिए ही इस्तेमाल करे।शौहर की इज़्ज़त और बात मानने का हुक्म तो अल्लाह ताला और इस के रसूल ने दिया है.

रब-ए-करीम ने इन रिश्ते के मुताल्लिक़ तालीम भी अता फ़र्मा दी है।फिर हम औरतों पर म’र्द को ये फ़ज़ीलत अल्लाह करीम ने ही दी है। कलाम पाक में नेक औरतें,इताअत करने वाली,अपनी हिफ़ाज़त करने वाली,अपने शौहर की इज़्ज़त करने वाली फ़रमाया गया है,इन सब बातो का कोई भी बहाना बनाकर नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते हैं,बीवी को अपने शौहर के साथ एक छत के निचे इज़्ज़त के साथ रहना भी अच्छा लगता हैं,बीवी को अपनी शौहर के हलाल रिज़्क़ को कमा कर खिलाना भी अच्छा लगता हैं.

नबी करीम सललल्लाहु अलैहि वसल्लम से एक मर्तबा पुछा गया,सब औरतों में से सबसे बेहतर कौन सी औरत है?आपने जवाब में फ़रमाया,उस का मफ़हूम कुछ यूं है,वो औरत सबसे अच्छी होती हैं कि जब उसका शौहर उसकी तरफ देखे तो वो शौहर को ख़ुश कर दे और जब वो इस को कोई हुक्म दे तो मान ले और इस की ना-फ़रमानी ना करे और ना उस के माल से ऐसा तसर्रुफ़ करे जिसे वो नापसंद करता हो।(अबू दाऊद,निसाई)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *