जब तुम्हारी ख्व़ाहिश हो कि तुम्हारी बेटी-बहन को तुम्हारे जैसा मर्द मिले तो ये समझो कि…

इंसान को अगर समझें तो ये मोटे-मोटे तौर पर दो तरह से देखा जाता है. एक वह जो मर्द है उसके नज़रिए से और एक औरत के नज़रिए से. बहुत सी बातें समाज में देखने को मिलती हैं.ये बातें हमें सीख भी देती हैं और कई बार बुराई से बचाती भी हैं. मर्द छोड़ने में जल्दी करता है और फिर सारी उम्र पछताता है पर औरत नही छोड़ती लेकिन जब छोड़ती है फिर पछताती नही.

ये बात मर्द की फितरत में है एक औरत से फायदा उठाने के बाद मधु मख्खी की तरह दोसरे गली में भिनभिना शुरू लर देता है, मर्दानगी की बात ये है कि मर्द की वजह से किसी औरत की आंख में आंसू न आये। किरदार सिर्फ औरत का ही नही होता मर्द हज़रात भी जब किरदार से गिर जाए तो बदकिरदार ही कहलायेंगे, मर्द की गैरत का पता उसके हाथ चलती औरत को पहनावे से लगाया जा सकता है,मर्द का काम औरत को समझना नहीं उसको महसूस करना होता है. उसकी हिफाजत करना. उससे मोहब्बत करना है. उसकी इज्जत करना.

यह बातें औरतों को मुश्किल से मुश्किल हालात में भी जीने का हौसला देती है। मर्द सारी जिंदगी झिड़कियां खाकर धक्के बर्दाश्त करता हुआ भी खर्च चलाना नहीं छोड़ता, मकान बनाता है परदेस की मिट्टी फांकता है, आखिर में उनके जवान बच्चे कहते हैं बाबा जी अगर आप कोई ढंग का काम कर लेते तो जिंदगी संवर न जाती मर्द अपनी औरत के लिए दुनिया की हर सहुलत खरीदता है उसकी कदर करें उसकी वजह से आप एक महफूज़ छत के तले आराम भरी जिंदगी गुजार रही हैं।

एक लड़के ने अपने बाबा से पूछना बाबा मर्द को कैसे पता चले कि उसका किरदार कैसा है क्योंकि कोई मर्द खुद को गलत नहीं कहता बाबा ने कहा जब तुम्हारी ख्वाहिश हो की तुम्हारी बेटी बहन को तुम जैसा मर्द मिले तो समझ जाओ तुम हक़ पर हो वरना खुद को सुधार लो।

जब कोई मर्द किसी औरत के लिए रोता है तो समझ लें वो और किसी से मोहब्बत नहीं कर सकता मोहब्बत के लिए ऐसे लोग ढूंढे जिनका माज़ी ने उन्हें तोड़ दिया है जिनकी ख्वाइश खत्म हो चुकी है जो जीना भूल चुके हैं वही लोग जिंदगी की हकीकत समझते हैं वही जानते हैं दर्द क्या होता है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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