जब शो’क में डू’ब गया था क्रिकेट जगत, सर पर लगी गेंद से हो गई खिलाड़ी की मौ’त

कुछ घटनाएँ ऐसी हैं कि जब भी आप उन्हें याद करें आपको दुःख होता है. कुछ इसी तरह की घटना का ज़िक्र हम आज आपसे करने जा रहे हैं. 80-90 के दशक में क्रिकेट के मशहूर खिलाड़ी रमन लाम्बा(Raman Lamba) जब अपने करीयर के शायद आख़िरी दौर में थे तब उनके साथ एक ऐसी घटना हुई जिसने उनकी जान ले ली.

लाम्बा शानदार बल्लेबाज़ थे और पारी की शुरुआत तेज़ करने के लिए जाने जाते थे. कहा जाता है कि श्रीलंकाई दिग्गज खिलाड़ी सनथ जयसूर्या और उनके जोड़ीदार रमेश कालूवितरना ने शुरू के दस ओवर में तेज़ बैटिंग कर के एकदिवसीय क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया. परन्तु उनके पहले भारत के कृष्णामचारी श्रीकांत और रमन लाम्बा ने भी ये कोशिश की थी लेकिन इस कोशिश में उन्हें बहुत कामयाबी न मिली.

लाम्बा के बारे में कहा जाता है कि वो खेल के प्रति बहुत सजग थे और क्रिकेट को जूनून की तरह से लेते थे. लाम्बा की ज़िन्दगी भी क्रिकेट के मैदान पर ही ख़त्म हो गई. 20 फ़रवरी, 1998 का दिन था और लाम्बा ढाका में बांग्लादेश के क्रिकेट क्लब अबाहानी क्रइरा चाकरा के लिए खेल रहे थे. इस क्लब का मैच मुहम्मडन स्पोर्टिंग से था. बंगबंधु स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में जब वो फ़ील्डिंग कर रहे थे तब एक ऐसा मौक़ा आया जब उन्हें फॉरवर्ड शोर्ट लेग (Raman Lamba at forward short leg) पर खड़ा किया गया.

ख़ालिद मशूद अबाहानी के कप्तान थे. उन्होंने बताया कि मैं स्पिनर सैफ़ुल्लाह ख़ान को बोलिंग करने के लिए लाया और तीन गेंद के बाद मैंने फ़ील्ड बदलने का फ़ैसला किया..मैंने इधर उधर देखा और मैंने फिर रमन को देखा तो उनको कहा कि वो फॉरवर्ड शोर्ट लेग पर खड़े हो जाएँ”. मशूद ने कहा कि मैंने लाम्बा से पूछा कि क्या उन्हें हेलमेट चाहिए लेकिन लाम्बा ने कहा,”सिर्फ़ तीन गेंद की तो बात है तो कोई परेशानी नहीं होगी”. बल्लेबाजी मेहराब हुसैन कर रहे थे.

सैफ़ुल्लाह ने एक शोर्ट बॉल फेंकी और मेहराब ने उसको ज़ोर से पुल किया लेकिन गेंद सीधे लाम्बा के माथे के टेम्पल एरिया पर जा लगी. लाम्बा के टेम्पल पर बॉल लगने के बाद बॉल उछल कर विकेट कीपर के पास चली गई और कैच हो गया. मशूद कहते हैं कि मुझे पता था कि मेहराब आउट हो गए लेकिन जब खिलाड़ी मेरी तरफ़ जश्न मनाने आये तो मैंने रमन की ओर देखा..रमन ग्राउंड पर गिरे हुए थे.लाम्बा इसके बाद उठे और फ़ील्डर्स को भरोसा दिलाया कि वो ठीक हैं.

वो धीरे धीरे ड्रेसिंग रूम गए वहाँ टीम डॉक्टर ने उन्हें लेटने को कहा और उन्हें पानी पीने को दिया लेकिन कुछ मिनट बाद ही लाम्बा ने टीम के सदस्यों से कहा कि वो ठीक महसूस नहीं कर रहे और उन्हें जल्दी से अस्पताल ले जाया गया. वो जब तक अस्पताल पहुँचे, वो बेहोश हो चुके थे. उनके ब्रेन के लेफ़्ट साइड से ख़ून का थक्का हटाया गया. दिल्ली से स्पेशलिस्ट डॉक्टर फ़ौरन ही ढाका रवाना किए गए लेकिन डॉक्टर ने उन्हें देखते ही कह दिया कि इसमें कोई उम्मीद नज़र नहीं आती और वो वापिस लौट आये.

लाम्बा तीन रोज़ तक लाइफ़ सपोर्ट पर रहे जिसके बाद परिवार की इजाज़त से इसे हटा लिया गया. उनकी पत्नी पति की चोट का सुनते ही दिल्ली से ढाका रवाना हुईं, उनके साथ उनका पाँच साल का बेटा और तीन साल की बेटी भी थी. इस घटना के बारे में बांग्लादेश के पूर्व खिलाड़ी मुहम्मद अमिनुल इस्लाम बताते हैं,”मैं न्यू मैन था और मैंने रमन से पूछा कि वो ठीक हैं.” इस पर रमन ने कहा,”बुल्ली (इस्लाम का निकनेम ‘बुलबुल’ है) मैं तो मर गया”. इस्लाम मेहराब का विकेट गिरने पर खेलने के लिए मैदान पर आये थे.

मशूद कहते हैं कि वो पहले प्राइवेट अस्पताल में थे और बाद में उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन बहुत देर हो चुकी थी.. उनकी मौ’त इस कारण हुई क्यूंकि तब हमारे पार बेहतर मेडिकल फैसिलिटी नहीं थीं. लाम्बा के निधन ने बांग्लादेश और भारत क्रिकेट को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हिला दिया. लाम्बा ने भारत के लिए 4 टेस्ट खेले जबकि 32 एकदिवसीय मैचों में भी उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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