इज़राइली PM ने इस मुस्लि’म देश पर क़’ब्ज़ा करने की दी ध’मकी, जवाब में सऊदी अरब ने कही ब’ड़ी बात…

नई दिल्ली: चुनाव एक ऐसा समय है जो लोकतान्त्रिक देशों में किसी भी राजनीति करने वाले का भवि’ष्य तय करता है. यही वजह है कि चुनाव के दौरान नेता ब’ड़े-ब’ड़े वादे करते हैं लेकिन जब उनके वादे क’मज़ोर पड़ने लगते हैं और जनता ये समझ चुकी होती है कि इनके वादों में कोई भी वादा पूरा होने वाला नहीं है तो वो कुछ इस तरह के ब’यान देते हैं कि मीडिया उन्हीं की चर्चा करे. अब मीडिया उन्हें बु’रा कहे तो कहे लेकिन वो चाहते यही हैं कि चर्चा उनकी बनी रहे.

कुछ इसी तरह का माहौल इजराइल में देखने को मिल रहा है. इसी महीने में होने वाले देश के आम चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू लगातार प्रचार कर रहे हैं लेकिन उनके एक बयान की वजह से पूरी दुनिया में उनकी निंदा हो रही है. हालाँकि देश में इस चर्चा का उन्हें फ़ायदा ही होने वाला है. नेतान्याहू ने एक बयान में कहा कि अगर उनकी पार्टी फिर सत्ता में आयी तो वो जॉर्डन वैली को इजराइल में शामिल कर लेंगे.

इस बयान की आ’लोचना पूरी दुनिया में हो रही है. संयुक्त राष्ट्र ने भी इस बयान की आलो’चना की है तो यूरोपियन यूनियन ने इस बारे में बयान दिया और कहा कि नेतान्याहू का बयान शा’न्ति के प्रयासों को बर्बाद करता है. यूरोपियन यूनियन ने कहा कि ये बहुत ही ख़त’रनाक बात है. इजराइल के बारे में माना जाता है कि उसके अरब वर्ल्ड में बहुत दोस्त नहीं हैं.

परन्तु जो दोस्त बनने की कोशिश कर भी रहे होते हैं उनको इस तरह के बयानों के बाद मुश्किल का सामना करना पड़ता है. कुछ ही रोज़ पहले ऐसी ख़बरें आ रहीं थीं कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान इजराइल से नज़दीकी बढ़ा रहे हैं.अब सऊदी अरब ने नेतान्याहू के ताज़ा बयान पर टिपण्णी की है. सऊदी अरब ने इजराइल के प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि सऊदी अरब इस तरह के बयान की आलोचना करता है.

सऊदी अरब ने कहा कि इस विषय पर OIC के विदेश मंत्रियों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई जायेगी. सऊदी अरब ने आगे कहा कि हम समझते हैं कि इस तरह के बयान शा’न्ति के प्रयासों को कमज़ोर कर देते हैं. सऊदी सरकार ने इस बयान को फ़िलिस्तीनी लोगों के ख़िला’फ़ बताया. बयान में कहा गया है कि जब तक फ़िलिस्तीनी लोगों को उनकी ज़मीन नहीं मिल जाती कोई भी शा’न्ति संभव नहीं है. जानकार मानते हैं कि नेतान्याहू का ये बयान पूरी तरह से चुनावी है और देश में उग्र-राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की कोशिश है.
(News Main Line के सहयोग से)

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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