इज़राइल में फ़िलिस्तीन विरो’धी PM की बढ़ी मुश्कि’ल, नई सरकार में अरब होंगे..

March 10, 2020 by No Comments

तेल-अवीव” इज़राइल में एक साल के अन्दर तीसरा आम चुनाव हुआ है. इस आम चुनाव के नतीजे भी इस तरह के हैं कि ये कहना मुश्किल है कि सरकार किसकी बनेगी. लिकुद नेता और मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू इस कोशिश में हैं कि उनकी पार्टी की सरकार बने. लिकुद की सीटें भी इस चुनाव में सबसे अधिक आयी हैं. लिकुद ने इस चुनाव में 36 सीटें जीती हैं जबकि उसकी विरोधी ब्लू एंड वाइट पार्टी ने 33 सीटों पर जीत हासिल की है.

120 सीटों की नेसेट में 61 सीटों पर बहुमत है और नतीजों से ज़ाहिर है कि दोनों ही दल बहुमत से दूर हैं. नतीजों के बाद से ही गठबंधन राजनीति की चर्चा तेज़ हो गई. ब्लू एंड वाइट पार्टी के नेता बैनी गैन्त्ज़ इस समय कोशिश कर रहे हैं कि वो फ़िलिस्तीनी हक़ों की बात करने वाली जॉइंट लिस्ट उनको समर्थन दे दे. आपको बता दें कि वो एविगडोर लिबेर्मन के साथ गठबंधन कर चुके हैं. ब्लू एंड वाइट की 33 और लिबेर्मन की 7 मिलकर 40 सीटें हो जाती हैं जबकि गैन्त्ज़ को भरोसा है कि 7 सीट वाली लेबर-गेशर-मेरेत्ज़ भी उनके साथ आ जाएगी.

ऐसे में उन्हें जॉइंट लिस्ट से ही समर्थन हासिल करना है. जॉइंट लिस्ट के पास 15 सीटें हैं. 12% से अधिक वोटों के साथ जॉइंट लिस्ट इज़राइल की राजनीति में तीसरा सबसे बड़ा समूह है. अगर जॉइंट लिस्ट मानती है तो गैन्त्ज़ के पास 62 सीटें हो जायेंगी जिसके बाद उनका प्रधानमन्त्री बनना लगभग तय हो जाएगा. नेतान्याहू इस बात को समझ रहे हैं और फ़िलहाल माहौल देख रहे हैं. वो कोशिश कर रहे हैं कि उनके पास भी गठबंधन हो जाए लेकिन लिबेर्मन चूंकि गैन्त्ज़ के पक्ष में आ चुके हैं इसलिए नेतान्याहू अब मुश्किल में हैं.

एक साल में तीन चुनाव हो जाने की वजह से राजनीतिक संकट ऐसा गहरा गया है कि आर्थिक तरक्क़ी भी देश में रुक सी गई है. इस वजह से अब सभी दलों पर दबाव है कि वो सरकार बनाएं. वहीं बेंजामिन नेतान्याहू नहीं चाहते कि किसी और दल की सरकार बने, उसकी वजह ये है कि नेतान्याहू पर जो भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं वो उनको मुश्किल में डाल सकते हैं.

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