तेल-अवीव: 12 साल से इजराइल की सत्ता पर क़ाबिज़ बेंजामिन नेतान्याहू का अब गद्दी छोड़ने का समय हो गया है. विपक्षी एकजुटता ने अब ये साफ़ कर दिया है कि नेतान्याहू का कार्यकाल यही तक है. नेतान्याहू हालाँकि अभी भी इस उम्मीद में हैं कि किसी तरह वह सत्ता में बने रहें लेकिन ऐसा अब मुमकिन नहीं लगता. दूसरी ओर नेफ्ताली बैनेट जोकि दक्षिणपंथी विचारों के ही हैं और बेंजामिन नेतान्याहू के पुराने साथी हैं, अब अपने साथी से अलग गठबंधन करके सत्ता में आने को तैयार हैं.

देखा जाए तो बैनेट और नेतान्याहू दोनों दक्षिणपंथी ही हैं लेकिन यहाँ एक फ़र्क़ ही है. असल में इस गठबंधन में नेफ्ताली बैनेट की यमिना बहुत छोटी पार्टी है और उसके अतिरिक्त जो पार्टियाँ हैं उनमें सेंटर टू लेफ़्ट, सेंटर और अरब पार्टी भी शामिल हैं. इस वजह से ऐसा माना जा रहा है कि नेफ्ताली भले ही दक्षिणपंथी हों लेकिन उन पर सबको साथ में लेकर चलने का दबाव शुरू से ही रहेगा.

इजराइल के इतिहास में भी ये पहली बार हो रहा है कि इजराइल की 20% अरब जनता को सरकार में आने का मौक़ा मिल रहा है. पहली बार एक अरब पार्टी सरकार का हिस्सा होगी. अरब पार्टी रा’म के नेता मंसूर अब्बास ने इस गठबंधन में शामिल होने का फ़ैसला किया है. उल्लेखनीय है
कि इजरायल के इतिहास में पहली बार हुआ है कि जो पार्टी, इजरायल में 21 फीसद अरब अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करती है वो इसमें आगे रही है. इसको बेनेट की यामिना पार्टी का समर्थन हासिल हुआ है.

इसके अलावा सेंटर-लेफ्ट ब्लू एंड व्हाइट जिसके प्रमुख रक्षा मंत्री बेनी गेंट्ज लेफ्ट विंग मेरेट्ज एंड लेबर पार्टी, पूर्व रक्षा मंत्री एविग्डोर लिबरमेन, राष्ट्रवादी ये इजरायल बेटन्यू पार्टी, राइट विंग पार्टी जिसके प्रमुख पूर्व शिक्षा मंत्री गिडोन शामिल हैं. हालांकि सरकार के गठन के बाद भी इस पर संकट की कोई कमी नहीं है.

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