तेल-अवीव: इज़राइल के राष्ट्रपति रयूवें रिव्लिन की सेहत को लेकर एक ख़बर आ रही है. जेरुसलम पोस्ट में छपी ख़बर के मुताबिक़ राष्ट्रपति रिव्लिन की तबीअत आज अचानक बिगड़ गई. पिछले कुछ दिनों से उन्हें पीठ में दर्द की शिकायत थी लेकिन उन्हें अस्पताल में दाख़िल कराया गया है. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति के बीमार होने के बाद भी वो स्वास्थ्य सलाहकारों की मदद से अपने कार्य करते रहेंगे. उल्लेखनीय है कि इस समय इज़राइल और फ़िलिस्तीन के बीच झड़प जारी है.

इज़राइल और हमास के बीच टकराव को एक हफ़्ते से ऊपर हो चुका है लेकिन अभी तक इसमें यु’द्ध-विराम जैसी बात नहीं हो सकी है. कई देश कोशिश में हैं कि हमास और इज़राइल के बीच शान्ति समझौता हो जाए. इज़रायली पुलिस की पूर्वी-जेरुसलम की अल-अक्सा मस्जिद पर आम लोगों पर हमला करने की कार्यवाई के बाद ये मामला बढ़ गया. हालाँकि मामला पूर्वी जेरुसलम के शेख़ जर्राह इलाक़े में रह रहे 6 फ़िलिस्तीनी परिवारों का है.

ये परिवार 1967 के पहले से यहाँ रह रहे हैं और जब वेस्ट बैंक तथा पूर्वी जेरुसलम जॉर्डन के अधिकार में था तब संयुक्त राष्ट्र की मदद से इन परिवारों को बसाया गया था. 1967 के यु’द्ध में इज़राइल ने जीत हासिल की तो उसने फ़िलिस्तीनी अरब लोगों को वो अधिकार कभी नहीं दिए जो असल में उनके थे. उनकी ही ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके इज़राइल ने उन पर हुक्म चलाना शुरू कर दिया. पीएलओ और इज़राइल के बीच शांति समझौता भी इस शर्त पर हुआ था कि इज़राइल अपनी इन हरकतों से बाज़ आएगा.

ओस्लो एकॉर्ड के कुछ साल तक तो इज़राइल ने कुछ सेटलमेंट्स हटाए लेकिन 2000 के बाद इज़राइल में कट्टरपंथी राजनीति ने ज़्यादा ज़ोर जमाया. इज़राइल की दक्षिणपंथी सरकारों ने एक बार फिर फ़िलिस्तीनी लोगों को उनकी ज़मीन से हटाने की कोशिश शुरू कर दी. हालाँकि अब उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ता है.

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