इज़राइल ने फ़िलिस्तीन पर की एयरस्ट्रा’ इक, 9 बच्चों समेत 24 की मौ’त..

May 11, 2021 by No Comments

ग़ाज़ा के स्वास्थ मंत्रालय ने बयान दिया है कि उत्तरी ग़ाज़ा में इजराइल ने जो एयरस्ट्राइ’क की है उसमें 24 लोगों की मौ’त हो गई है. मंत्रालय ने बताया कि म’रने वालों में 9 बच्चे शामिल हैं जबकि 100 से ज़्यादा लोग इज़राइल के ह’मले में घा’यल हुए हैं. मंत्रा’लय के प्रवक्ता अ’शरफ़ अल-क़ुद्रा ने बताया कि 9 श’हीदों की ला’शें जिनमें 3 बच्चे भी हैं और कई घा’यल लोगों को बेत हनौन अस्प’ताल लाया गया है.

अधिकारियों ने हालाँ’कि ये तो नहीं बताया है कि इनकी मौ’त किस तरह हुई है लेकिन इस तरह की रि’पोर्ट्स आ रही हैं कि इज़रा’इल के ह’मले में इनकी जा’न गई है. जेरुस’लम की प’वित्र अ’ल-अक्सा म’स्जिद में इज़’राइली पु’लिस की रे’ड और शां’तिपूर्ण नमा’ज़ प’ढ़ रहे लोगों के ऊपर ह’मले के बाद मा’हौल काफ़ी तना’वपूर्ण हो गया है.

फ़िलि’स्तीनी प्रदर्श’नकारी और इज़’रायली पुलि’स के बीच ट’कराव की स्थिति तब पै’दा हो गई जब शेख़ जर्राह में रह रहे 6 फ़ि’लिस्तीनी परिवारों को अनै’तिक तरह से निका’लने की को’शिश की जाने लगी. इस त’नाव के बाद इज़रा’इली सुप्रीम कोर्ट ने अपना फ़ै’सला एक महीने के लिए टा’ल दिया है. शेख़ ज’र्राह मु’हल्ले को लेकर पहले भी वि’वाद होता रहा है. शेख़ ज’र्राह मुहल्ले को 1876 में दो य’हूदी ट्र’स्ट ने अरब ज़’मीदारों से ख़’रीदा था.

1948 में जॉर्डन ने अ’रब-इज़’राइली यु’द्ध के बाद शेख़ जर्राह को अपने क़’ब्ज़े में ले लिया. सं’युक्त राष्ट्र की म’दद से जॉर्डन ने यहाँ 28 घर बनाए जो फ़ि’लिस्तीनी रि’फ्यूजी के लिए थे, ये घर उन रिफ्यू’जी के लिए बनाए गए थे जो इज़’राइल के ड’र से भाग कर ईस्ट जेरुसलम आ गए थे. इसके बाद जब 1967 में 6 दिन का यु’द्ध हुआ तो ये क्षेत्र इज़’राइल के क़’ब्ज़े में आ गया और इ’ज़राइल ने ये घर य’हूदी ट्रस्ट को दे दिए.

इसके बाद यहू’दी ट्रस्ट ने ये घर कट्ट’र दक्षिण पंथी से’टलर संस्था को बे’च दिए जिसके बाद कट्ट’रपंथी लोग इन घरों से फ़िलि’स्तीनी लो’गों को निकालने की कोशिश करते रहते हैं. असल में इस पूरे विवा’द का सबसे बड़ा कारण इ’ज़राइल का वो क़ानून है जिसके मुताबिक़ 1948 से पहले ईस्ट जेरुसलम में रहने वाले यहू’दियों को ज़मीन का अधिकार है लेकिन ये नियम फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ नहीं है.

कुछ जानकार मानते हैं कि 1948 के यु’द्ध के बाद ये हिस्सा चूंकि जॉर्डन के क़’ब्ज़े में चला गया तो उस समय ये बात नहीं सोची गई थी कि ये इज़राइल के क़’ब्ज़े में जा सकता है, 1967 में जब इज़’राइल ने इसे अपने क़ब्ज़े में लिया तो इस क्षेत्र के फ़िलिस्ती’नी लोगों के पास कोई क़ा’नून नहीं था. इज़राइल के क’ट्टर-दक्षिण पंथी नेताओं ने भी इस तरह के वि’वादों में घी डा’लने का काम किया है.

ताज़ा मामले में भी इतमर बेन-ग्वीर नामक एक क’ट्टर दक्षि’णपंथी इज़’रायली नेता ने शेख़ जर्राह जाकर लोगों को उक’साने का काम किया जिसके बाद यहूदी सेट’लर और अरब फिलिस्तीनियों के बीच वि’वाद शुरू हो गया और पु’लिस ने प्रदर्श’नकारियों पर बल का प्रयोग किया. इसके पहले इज़रायली सरकार द्वारा दमिश्क गेट को बंद किए जाने पर भी वि’वाद हो गया था, दमिश्क गेट मुस्लि’म समु’दाय के लिए विशेष महत्व रखता है.

फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति द्वारा 2021 के चुनाव को टा’लने की ख़बर ने भी माहौल को ग’र्म किया. विश्लेषक मानते हैं कि राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अपनी पार्टी की हार के डर से इन चुनाव को टाला है. दूसरी ओर इज़रायली दक्षिण पंथी नेताओं को भी इसमें फ़ायदा नज़र आ रहा है. पिछले कुछ सालों से इज़राइल में राजनीतिक संकट बना हुआ है और एक बार फिर जल्द ही चुनाव की उम्मीद लगाई जा रही है. ऐसे में दक्षिणपंथी पार्टियाँ अपने पक्ष में कट्टर यहूदी वोट हासिल करने के लिए उकसावे वाली चीज़ें करती रहती हैं.

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