इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाने वाले दलितों को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ- रविशंकर प्रसाद

February 14, 2021 by No Comments

नई दिल्ली: गुरूवार के रोज़ राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रविशंकर प्रसाद ने अहम् बयान दिया है. उन्होंने धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों को लेकर पूछे गए एक सवाल पर टिपण्णी की. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए साथ ही कहा कि दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले ऐसे लोग जो इस्लाम या ईसाई धर्म अपना चुके हैं उन्हें आरक्षण से जुड़े अन्य लाभ नहीं मिलेंगे.

उन्होंने कहा कि हालांकि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले दलित अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ सकते हैं और आरक्षण का लाभ भी ले सकते हैं। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में बीजेपी सांसद जीवीएल नरसिंहा राव के आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में पात्रता के सवाल पर पूछे गए सवालों के जवाब में यह जानकारी दी।

कानून मंत्री ने अपने जवाब में कहा, ‘संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश, का पैरा-3 अनुसूचित जातियों की राज्यवार सूची को परिभाषित करती है।इसके अंतर्गत कोई व्यक्ति जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग धर्म मानता है, अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं समझा जाएगा। वैध अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के साथ कोई भी व्यक्ति आरक्षित स्थानों से चुनाव लड़ने के लिए योग्य है।’

इस सवाल पर कि क्या सरकार लोक प्रतिनिधित्व कानून और निर्वाचन नियमावली में ऐसे किसी संशोधन पर विचार कर रही है जिसमें यह स्पष्ट रूप से उल्लेख हो कि ईसाई या इस्लाम में धर्मपरिवर्तन करने वाले दलित आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने के योग्य नहीं होंगे, कानून मंत्री ने कहा कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।

लोक प्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा-4 (क) के मुताबिक, लोकसभा में किसी स्थान को भरने के लिए चुने जाने के लिए कोई व्यक्ति तब तक अर्हित न होगा जब तक कि अनुसूचित जातियों के लिए किसी राज्य में आरक्षित स्थान की दशा में, वह उस राज्य की या किसी अन्य राज्य की अनुसूचित जातियों में से किसी का सदस्य न हो और किसी संसदीय निर्वाचन-क्षेत्र के लिए निर्वाचक न हो।

वहीं, धारा-5 (क) के मुताबिक, किसी राज्य की विधान सभा में के स्थान को भरने के लिए चुने जाने के लिए कोई व्यक्ति तब तक अर्हित न होगा जब तक कि उस राज्य की अनुसूचित जातियों के लिए या अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित स्थान की दशा में, वह, यथास्थिति, उन जातियों में से या उन जनजातियों में से किसी का सदस्य न हो और उस राज्य में के किसी सभा निर्वाचन-क्षेत्र के लिए निर्वाचक न हो।

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