नोबेल पुरस्कार जितना सम्मान लोगों की न’ज़रों में रखते हैं उतनी ही मेहनत, लगन और ईमानदारी से ही नोबल पुरस्कार पाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ जब 300 से ज़्यादा दा’वेदारों को पी’छे छो’ड़कर इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार इथो’पिया के ‘नेल्सन मंडेला’ कहलाए जाने वाले इथो’पिया के प्रधानमंत्री अबि अह;मद ने अपने नाम किया।

बता दें कि अबि अह’मद अफ्रीकी देश के सबसे युवा राष्ट्र अध्यक्ष हैं। अप्रैल 2018 में गृ’हयु’द्ध की आग में झुलस रहे इथो’पिया की स”त्ता संभालने के बाद से ही अह’मद ने इरिट्रिया से संबंध सु’धारने की क़वा’यद ते’ज़ कर दी थी और जुलाई में एरिट्रिया की राजधानी असमारा में हुई ऐतिहासिक मुलाक़ात में उन्होंने अफवेर्की के साथ मिल कर दो दशक पुराना सीमा विवा’द ह’ल करने का ऐ’लान किया। दोनों देशों ने शांति पर मुहर लगा दी जिसके बाद से दोनों दे’शों के बीच संबं’ध सामा’न्य हो गए हैं।

Abi Ahmad

उल्लेखनीय है कि अह;मद ने इथोपिया के प्रधानमंत्री बनने के शुरुआती 100 दिनों में ही देश से इम’रजेंसी हटाई। राज’नीतिक बं’दियों को रि’हा किया। जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को इथो’पिया से निर्वा’सित कर दिया गया था, उन्हें स्वदेश लौ’टने की इजाज़त दी। मीडिया पर जो सेंस’रशिप थी, उसे ख़’त्म किया। प्रतिबंधित विप’क्षी द’लों को मान्यता दी। भ्र’ष्टा’चार के आरोपी सै’न्य और सिया’सी नेताओं को बर्ख़ास्त करते हुए इथोपिया सरकार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई।

इसके साथ ही सितंबर 2018 में अह’मद ने इरि;ट्रिया और जि’बूती के बीच बरसों की राजनी’तिक श’त्रुता को ख़त्म करके कूटनीतिक रि’श्तों को सामान्य ब’नाने में अहम योगदान दिया। उन्होंने केन्या और सोमालिया में समु’द्री इ’लाके की वजह से हो रहे संघ;र्ष को ख़’त्म करने में मध्य/स्थ की भूमि’का निभाई। साथ ही सूडान के सैन्य शा’सन और प्रदर्श’नका’रियों के बीच सुल’ह करवाने में भी अह’मद की अह’म भूमिका रही

बता दें कि नोबेल समिति ने शांति स्थापना के लिए राष्ट्रपति इजैज़ अफवेर्की की भूमिका की भी तारीफ़ की नोबेल समिति का कहना है कि, “शांति किसी एक पक्ष के प्रयासों से संभव नहीं है। जब अह।मद ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो अफवेर्की ने उसे तहेदिल से स्वीकारा। इससे दोनों देशों के बीच शांति स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।”

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