पटना. जातीय जनगणना बिहार में एक बड़ा मुद्दा बनता नज़र आ रहा है. राजद के आक्रामक रुख ने जदयू को भी बैकफुट पर ला दिया है वहीं भाजपा नेता इस भी अब इस मुद्दे पर बोलते नज़र आ गए हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या ने केंद्र सरकार से माँग की है कि जातीय जनगणना कराई जाए.

बिहार की राजनीतिक गलियां 2015 के माहौल में ढल रही हैं. जातीय जनगणना के मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का पक्ष एक ही है वहीं भाजपा जोकि राज्य में जदयू का साथी है, जातीय जनगणना का विरोध करती नज़र आ रही है. बिहार भाजपा के नेता इस पर अपना विरोध जताते नज़र आ रहे हैं.

जिस तरह से माहौल बन रहा है उससे मुमकिन है कि 2015 के सियासी समीकरण फिर से बन जाए. उल्लेखनीय है कि बुधवार के रोज़ राजद ने ट्वीट किया है और कहा है कि मुट्ठी भर चितपावन ब्राह्मणों के जातिवादी संगठन राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ की इतनी औकात नहीं कि देश के 85 फीसद एससी-एसटी और ओबीसी का आरक्षण रोक सकें. राजद ने मोहन भागवत का भी नाम लिया है.

लालू प्रसाद यादव की पार्टी राजद ने दत्‍तात्रेय होसबोले के बयान पर एक खबर को भी शेयर किया है. इस ट्वीट में लिखा गया है,”मुट्ठीभर चितपावन ब्राह्मणों के जातिवादी संगठन की इतनी औक़ात भी नहीं कि देश के 85% SC/ST/OBC के आरक्षण को रोक दें. भागवत ने एक बार बोला था, क्या हश्र हुआ था, पता है ना? आरएसएस तुम्हारी सारी चालाकियां समझते हैं. तुम सोचते हो सब बेच आरक्षण को बैकडोर से खत्म कर देंगे. नहीं होने देंगे.”

बता दें कि हाल में ही आरएसएस के दत्‍तात्रेय होसबोले (Dattatreya Hosbole) ने आरक्षण के विषय में बयान दिया था. उन्होंने अपने बयान में अकहा था कि संघ आरएसएस का ‘पुरज़ोर समर्थक’ है. भारत का इतिहास पिछड़े और दलितों के इतिहास के बगैर ‘अधूरा’ है. वे सामाजिक परिवर्तन में अग्रणी रहे हैं. रिजर्वेशन सकारात्मक कार्रवाई का जरिया है. आपको बता दें कि राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजद का ट्वीट संकेत दे रहा है कि राजद इस मुद्दे पर आगे बढ़कर सामने आ रही है, ये बात आरएसएस को परेशान कर रही है.

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *