नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट टीम इस समय उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है जितना वो कुछ महीने पहले कर रही थी. इसको लेकर अब अन्दर अन्दर बहस जारी है कि इसके पीछे क्या परेशानी है. अब ख़बर है कि BCCI भारत के दिग्गज खिलाड़ी रहे राहुल द्रविड़ से ख़ुश नहीं है. द्रविड़ जोकि भारत की कई बड़ी जीतों में भूमिका निभा चुके हैं, इस समय आलोचना के घेरे में हैं. उनकी आलोचना कोई और नहीं बल्कि BCCI के अधिकारी ख़ुद कर रहे हैं.

असल में टीम इंडिया के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ मौजूदा समय में नेशनल क्रिकेट एकेडमी के अध्यक्ष हैं. ये अकादमी बंगलुरु में स्थित है और यहाँ खिलाड़ियों की फिटनेस का परीक्षण होता है. कहने का अर्थ है कि अगर कोई भारतीय अनफ़िट होता है तो वो एनसीए में ही ठीक होता है और उसी की क्लीन चिट के बाद उसे दोबारा टीम इंडिया में जगह मिलती है, लेकिन पिछले कुछ समय से एनसीए पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं क्योंकि जो भी खिलाड़ी एनसीए जा रहा है, उसकी या तो चोट बिगड़ रही है और या फिर वो दोबारा चोटिल हो रहा है.

असल में मामला ईशांत शर्मा से जुड़ा हुआ है. शर्मा न्यूजीलैंड दौरे पर एक टेस्ट मैच खेलने के बाद तुरंत चोटिल हो गए, जबकि उन्हें एनसीए ने टेस्ट सीरीज शुरू होने से तीन दिन पहले फिट घोषित कर दिया था. मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक़ राहुल द्रविड़ पर दबाव बनाया जा रहा है कि इस नाकामी की ज़िम्मेदारी वो लें. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई अधिकारी ने कहा, ‘ये दिलचस्प है कि इशांत शर्मा को फिट घोषित कर दिया गया था. राहुल द्रविड़ देश के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में से एक हैं लेकिन बीसीसीआई प्रशासन हर मामले में कठोर है. अब क्योंकि राहुल द्रविड़ ही एनसीए में फैसले लेते हैं तो ऐसे में उन्हें इस मामले की जिम्मेदारी भी लेनी होगी.’

इसके अलावा बीसीसीआई अधिकारियों ने जसप्रीत बुमराह के फिटनेस टेस्ट ना कराने के मुद्दे पर भी एनसीए को घेरा है. उल्लेखनीय है कि एनसीए ने जसप्रीत बुमराह का फिटनेस टेस्ट करने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्होंने अपनी चोट कहीं और ठीक कराई थी. हालांकि बुमराह वापसी के बाद से बिल्कुल फिट हैं और इशांत शर्मा जो एनसीए की देखरेख में अपनी चोट सही करा रहे थे वो एक मैच खेलने के बाद दोबारा चोटिल हो गए. उनके टखने की चोट एक बार फिर उभर आई. साफ है कि ये मामला अब बड़ा हो रहा है और इसीलिए राहुल द्रविड़ पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, अब इंतजार ये है कि एनसीए चीफ इस मामले पर क्या फैसला लेते हैं.

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