इस दौर के 3 अविष्कार जो जितनी तेज़ी से आए, उतनी ही तेज़ी से ग़ायब भी हो गए..

October 15, 2020 by No Comments

इसमें शायद ही किसी को शक हो कि इस दौर में सबसे बड़ा कोई आविष्कार है तो वो इन्टरनेट है. इन्टरनेट ने दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. दुनिया को बदल भी दिया है और लगातार हर रोज़ दुनिया को बदलने की क्षमता भी इन्टरनेट में है. तकनीक की इस महान सदी में हम हर रोज़ नए आविष्कार देख रहे हैं, इनमें से कुछ हमारे रोज़ के काम के होते हैं तो कई ऐसे भी हैं जो किसी काम के नहीं रह जाते. हम आज आपको पाँच ऐसे अविष्कारों का बता रहे हैं जो आये थे तो लगा था कि क्या कमाल की चीज़ है लेकिन बहुत जल्दी ये पूरी तरह ग़ायब हो गए.

गूगल ग्लास: साल 2012 में गूगल ने गूगल ग्लास लॉन्च हुआ. जब ये आया तो लोगों में बड़ी जागरूकता पैदा हो गई. इसमें 5 मेगापिक्सल्स का कैमरा भी था. इसकी ख़ासियत को तो लोगों ने सराहा लेकिन privacy की वजह से शायद ही कोई इसको लेना चाहता. ऊपर से जो लोग लेना भी चाहते तो उनके लिए इसके दाम काफ़ी ज़्यादा थे. 2015 के आते तक ये डिवाइस बाज़ार से पूरी तरह ग़ायब हो गई.

ऑरकुट: सन 2004 में ऑरकुट को गूगल ने लॉन्च किया था. ये एक सोशल मीडिया वेबसाइट की तरह थी, इसको तुर्की के सॉफ्टवेर इंजिनियर ऑरकुट बुयुक्कोकतेन ने बनाया था. सन 2008 में ऑरकुट भारत और ब्राज़ील की सबसे ज़्यादा पॉपुलर साईट बन गई लेकिन स्मार्टफ़ोन के चलन ने इस साईट की पॉपुलैरिटी को कम कर दिया था. असल में ऑरकुट कंप्यूटर या लैपटॉप पर जितना अच्छा काम करती थी, उतना अच्छा ये मोबाइल पर नहीं करती थी. यही वो समय है जब फ़ेसबुक ने अपनी पकड़ बनाना शुरू किया और देखते-देखते बाज़ार पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया. सन 2014 में गूगल ने ऑरकुट को बंद कर दिया.

टीवो: एक समय टीवी के दर्शकों को इसकी बड़ी चिंता रहती थी कि कोई प्रोग्राम वो देखने से चूक गए तो कैसे देखेंगे. मनोरंजन की इसी चाह को समझते हुए लॉन्च किया गया था टीवो, इसके ज़रिए टीवी को रिकॉर्ड किया जा सकता था. शुरू में तो इसका एड ख़ूब टीवी पर आया लेकिन जब इन्टरनेट पर सभी प्रोग्राम मिल जाने लगे और इन्टरनेट ही इतना सस्ता हो गया..तो लोगों ने टीवो को भुला दिया.

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