इंदिरा गांधी ने दिया था अहमद पटेल को लोकसभा का टिकट, हर बार ठुकराया मंत्रीपद..

November 25, 2020 by No Comments

हमने इस दौर में देखा है कि कैसे मंत्री बनने के लिए नेता अपनी पार्टी और विचारधारा से समझौता कर लेते हैं. मंत्री और पद की इतनी हड़बड़ी रहती है कि जो भी दे उस दल में चले जाएँगे. कितने ही नेता हैं जो कभी भाजपा में थे फिर कांग्रेस में आ गए, कांग्रेस में थे भाजपा में चले गए लेकिन एक ऐसा नेता रहा जिसने पद की कभी चेष्टा नहीं की और अपनी ज़िन्दगी के सारे साल अपनी पार्टी की सेवा में लगा दिए. हम बात कर रहे हैं दिवंगत राजनेता अहमद पटेल की.

अहमद पटेल का जन्म 21 अगस्त 1949 को भरूच में हुआ था. अपनी युवा अवस्था में उन्होंने यूथ कांग्रेस ज्वाइन कर ली और 1976 में भरूच ज़िले के लोकल बॉडी इलेक्शन से सक्रिय चुनावी राजनीति में क़दम रखा. 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें भरूच लोकसभा से कांग्रेस का टिकट दिया और ऐसे समय जबकि कांग्रेस की देश में बड़ी हार हुई थी, पटेल ने जीत दर्ज की. अब तक गुजरात से दो ही मुस्लिम लोकसभा पहुँचे हैं, एक तो अहमद पटेल हैं और दूसरे दिवंगत नेता एहसान जाफ़री.
Ahmed Patel
1977 के बाद 1980 और 1984 में भी अहमद पटेल ने लोकसभा चुनाव जीते. 1985 में वो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी हो गए. 1993 से अहमद पटेल लगातार राज्यसभा सांसद चुने गए. सन 2004 में जब कांग्रेस नेतृत्व में UPA सरकार बनी तब अहमद पटेल को केन्द्रीय मंत्रालय में शामिल करने की बहुत कोशिश की गई लेकिन उन्होंने कहा कि वो कांग्रेस संगठन में काम करेंगे. अहमद पटेल ने कांग्रेस को कई बार मुश्किलों से निकाला. 90 के दशक के अंत में जब लोग कहने लगे कि कांग्रेस अब ख़त्म हो चुकी तो उनकी ही नीति रही कि 2004 में कांग्रेस ने ज़ोरदार वापसी की.

जब 2017 में गुजरात में राज्यसभा चुनाव हो रहे थे तो भाजपा ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी कि किसी भी तरह से वो अहमद पटेल को हरा पाए लेकिन अहमद पटेल ने आख़िरी मौक़े पर सियासत की वो चाले चलीं जिसमें भाजपा उलझ गई. 2017 में अहमद पटेल की जीत मौजूदा दौर में कांग्रेस के लिए बड़ी बात मानी गई. पटेल लगातार पार्टी को मज़बूत करने का काम कर रहे थे. हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में जब गठबंधन में पेंच फँस रहा था तो पटेल ने ही इसे सूझबूझ से हल किया. अहमद पटेल मीडिया से कम ही रू-ब-रू होते थे.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *