लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरी थीं लेकिन अपेक्षा के हिसाब से कामयाबी न मिल पाने की वजह से दोनों पार्टियों ने अपने रास्ते अलग-अलग कर लिए हैं. बसपा प्रमुख मायावती ने सपा से गठबंधन तोड़ दिया और कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी. उपचुनाव को लेकर बसपा ने अपनी तैयारी शुरू भी कर दी है वहीँ सपा ने भी अब कमर कस ली है.

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं. उपचुनाव में रामपुर और गंगोह विधानसभा सीट भी हैं.गंगोह विधानसभा सीट से प्रदीप कुमार विधायक थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में वह कैराना से मैदान में उतरे और गठबंधन की उम्‍मीदवार तबस्‍सुम हसन को हराकर संसद पहुंचे।इस वजह से गंगोह विधानसभा सीट खाली हो गई. रामपुर सीट से आज़म ख़ान विधायक थे लेकिन वो सांसद चुन लिए गए हैं.

बसपा द्वारा अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद सपा भी अपने रास्‍ते चल दी है.लेकिन बसपा के लिए एक बुरी खबर ये है कि बसपा जहाँ अकेले लड़ रही है वही सपा के साथ और दल आने को तैयार है. रालोद ने पहले ही ये कहा था कि वो सपा के साथ गठबंधन में है वहीँ अब रालोद अध्यक्ष ने भी कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं.

इस तरह की बातें भी राजनीतिक गलियारों में चल रह हैं कि इस गठबंधन में रालोद और सपा के साथ काग्रेस भी आ सकती है. चर्चा है कि सपा के गंगोह जिलाध्‍यक्ष चौधरी रुद्रसेन अपने भाई को चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं. इसके लिए उन्‍होंने आलाकमान से अपनी इच्‍छा भी जाहिर कर दी है.इसके लिए वह कई पंचायतें भी कर चुके हैं।चौधरी रुद्रसेन का कहना है कि सपा गंगोह सीट पर अपना प्रत्‍याशी उतारेगी।उधर,गठबंधन की अटकलों के बीच रालोद ने भी दावेदारी जताई है.

रालोद जिलाध्‍यक्ष राव कैसर सलीम का कहना है क‍ि 2018 के कैराना लोकसभा उपचुनाव में तबस्‍सुम हसन ने चुनाव जीती थी.उन्‍हें गंगोह में काफी बढ़त मिली थी।इस लिहाज से गंगोह से रालोद का उम्‍मीदवार मजबूत रहेगा।उन्‍होंने कहा कि दावेदारी की जा रही है.बाकी पार्टी जो फैसला करेगी,माना जाएगा।वहीं,कांग्रेस भी अपना प्रत्‍याशी उतारने की बात कह रही है.

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