ICC के एक्शन से दबा’व में आया इज़राइल, नेतान्याहू प्रशासन में घबरा’हट..

इज़राइल की सरकार पर पिछले कई दशकों से ये आरोप लगते रहे हैं कि वो मानवाधिकार का उल्लं’घन करती है. बजाय इस पर कोई सफ़ाई देने के इज़राइल की सरकार का रुख़ आक्रामक रहता है. परन्तु इस समय इज़राइल बुरी तरह घब’राया हुआ है. इज़राइल को ये समझ नहीं आ रहा है कि वो किस तरह से अन्तराष्ट्रीय दबाव से निकले. असल में अंतर्राष्ट्रीय फ़ौजदारी अदालत आईसीसी के अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में इस्राईल के यु’द्ध अ’पराध की जांच शुरु करने के फ़ैसले से ज़ायोनी सरकार घबरा गई है.

खुलेआम जॉर्डन वैली को अपने क़ब्ज़े में लेने की बात करने वाला इज़राइल अब इस पर पीछे हटता दिख रहा है. एक पोर्टल पर छपी ख़बर के मुताबिक़, ज़ायोनी प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतनयाहू की यह योजना थी। ज़ायोनी अख़बार यदिओत अहारोनोत ने मंगलवार को रिपोर्ट में बताया कि जॉर्डन वैली पर इज़राइल की संप्रभुता लागू करने के लिए अंतर-मंत्रीय समिति की पिछले हफ़्ते प्रस्तावित बैठक, शुरु होने से कुछ घंटे पहले रद्द हो गयी।

इस पैनल की बैठक जिसकी अध्यक्षता ज़ायोनी प्रधान मंत्री कार्यालय के कार्यवाहक महानिदेशक रोनेन पेरेट्ज़ करने वाले थे, उस वक़्त रद्द हुयी जब यह स्पष्ट हो गया कि आईसीसी की इस्राईल के युद्ध अपराध की जांच जल्द ही होने वाली है। एक सूत्र ने ज़ायोनी अख़बार यदीओत अहारोनोत को बताया कि हेग अदालत के न्यायवादी के फ़ैसले की वजह से जॉर्डन वैली को शामिल करने का विषय ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

असल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू देश में भी राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं. एक तो उन पर भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला शुरू हो गया है और दूसरा वो एक साल के भीतर हुए दोनों चुनाव में बहुमत नहीं हासिल कर सके हैं जिस कारण एक और चुनाव होने की संभावना है. अगर इस चुनाव में उनकी हार होती है तो ये उनके राजनीतिक करीयर का अंत भी हो सकता है.

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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