हज़रत अली रज़ि अल्लाहू अन्हु का मुसलमानों मे बहुत आला मक़ाम है आप हज़रत मौहम्मद स० अ० के दामाद हैं चार खुलफ़ा ए राशिदीनों मे से एक हैं आप मुसलमानों के चोथे ख़लीफ़ा थे आपने रसूल अल्लाह स० अ० के साथ बहुत वक्त गुज़ारा है यहाँ हम उनके कुछ अक्वाल पैश कर रहे हैं जो यकीनी तौर पर ईमान की पुख्तगी के लिए फायदेमंद हैं।

1)हज़रत अली रज़ि० अ० फ़रमाते हैं कि मैने इस मिम्बर की लकड़ी पर हुज़ूर स० अ० को फ़रमाते हुए सुना कि जो हर नमाज़ के बाद आयतल कुर्सी पढ़ेगा उसे जन्नत मे जाने से मौ’त के अलावा कोई चीज़ रोकने वाली नहीं होगी और जो इसे सोने से पहले बिस्तर पर लेटते हुए पढ़ेगा अल्लाह तआला उस के घर पर उसके पड़ोसी के घर पर और उसके इर्द गिर्द के चंद घरों पर अमन अता फरमायेंगे।

2) हज़रत अली रज़ि ० अ० ने एक मरतबा फ़रमाया कि मुझे ऐसा कोई आदमी नज़र नहीं आता जो पैदाइश से मुसलमान हो या बालिग हो कर मुसलमान हुआ हो और इस आयत “ अल्लाहु ला इ लाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम को पढ़े बगैर रात गुज़ारता हो काश कि आप लोग जान लेते इस आयत का कितना बड़ा दर्जा है यह आयत आप लोगों के नबी को उस ख़ज़ाने से दी गई है जो अर्श के नीचे है और आप लोगों के नबी से पहले किसी नबी को नहीं दी गई।मै इसे हर रात तीन मरतबा पढ़ कर सोता हूँ ।ईशा ( की नमाज़ ) के बाद दो रकअतो मे,और वितर मे भी इसे पढ़ता हूँ ।और बिस्तर पे लेटते वक्त भी इसे पढ़ता हूँ।

3) एक और जगह हज़रत अली रज़ि ० अ० फ़रमाते है कि जो यह चाहता है कि उसका अज्रो सवाब बहुत बढ़े और मुकम्मल पैमाने पर तोला जाए तो वह यह आयतें तीन बार पढ़े। “ सुबहाना रब्बिका रब्बिल इज़ज़ती अम्मा यसीफ़ून” ( सूरह : साफ़ात ,आयत 180) । तर्जुमा- आप का रब जो बड़ी अज़मत वाला है उन बातों से पाक है जो यह (काफ़िर) बयान फ़रमाते हैं। पढ़ने के बाद इसको आगे भी शेयर करें जो भी अमल करेगा उसका सवाब आपको भी मिलेगा

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.