2019 लोकसभा चुनाव के पहले से ही इस बात को लेकर विशेष चर्चा थी कि उत्तर प्रदेश में कौन सी पार्टी जीत हासिल करेगी. भाजपा के नेताओं ने दावा किया कि इस बार उनका लक्ष्य 75 प्लस है. वहीँ महागठबंधन बन्ने से उत्साहित सपा-बसपा-रालोद को भी इस बात की उम्मीद होने लगी कि वो भी 70 प्लस का दावा कर सकते हैं. वहीँ कांग्रेस को संजीवनी बूटी मिली प्रियंका गांधी के आने से. ऐसे में मुक़ाबला त्रिकोणीय नज़र आने लगा लेकिन दो चरणों के मतदान के बाद क्या स्थिति है आइये समझते हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 16 सीटों के लिए वोट डाले जा चुके हैं और इसको लेकर जो रिपोर्ट्स आ रही हैं वो भाजपा के लिए बिलकुल भी अच्छी नहीं हैं. हालाँकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ये कह रहे हैं कि उनकी पार्टी ने विरोधी दलों का सफाया कर दिया है लेकिन ऐसा कुछ भी नज़र नहीं आ रहा है. भाजपा इन 16 सीटों में से बहुत कम सीटों पर जीतती दिख रही है. क्षेत्रीय जानकार भाजपा को इस चरण में 2 से 5 सीटें दे रहे हैं वहीँ दूसरी ओर बड़ा फ़ायदा महागठबंधन को हुआ है.

कांग्रेस के बारे में भी ये सूचना है कि कांग्रेस भी बहुत अच्छा प्रदर्शन इन सीटों पर नहीं कर सकी है. इस बात का सीधा फ़ायदा सपा-बसपा को मिला है. महागठबंधन इन 16 सीटों में से 10 से 13 सीटें जीत सकता है. इसी आधार पर अगर आने वाले चरणों में स्थिति बनी तो भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए इन चुनावों में उत्तर प्रदेश से दहाई का आँकड़ा पार करना मुश्किल हो जाएगा.

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