महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला की रि’हाई के लिए मोदी सरकार ने की बातचीत, इस श’र्त पर हो सकती है..

मीडिया में अब इस तरह की ख़बरें आ रही हैं कि जम्मू-कश्मीर में हा’लात सुधारने के लिए सरकार जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती से बात कर रही है. हालाँकि अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं लेकिन विशिष्ठ सूत्रों के हवाले से जो ख़बरें मीडिया के अलग-अलग चैनलों में आ रही हैं वो इसी तरह की हैं कि हिरा’सत में लिए गए नेताओं से बात चल रही है.

अगस्त के शुरू में सरकार ने संविधान में संशोधन करके अनुच्छेद 370 को लगभग अप्रभावी कर दिया है. इसके पहले जम्मू-कश्मीर के बड़े नेताओं को गिर’फ़्तार कर लिया गया या उन्हें हाउस-अरे’स्ट कर लिया गया. सरकार बार-बार ये कह रही है कि ये सिर्फ़ प्रीवेंटिव अ’रेस्ट है और हाला’त सामान्य होते ही नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा.

उच्च पदस्थ सूत्रों से अब जो ख़बर आ रही है उसके मुताबिक़ विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के सदस्यों का एक दल कुछ शर्तो पर दोनों नेताओं को रिहा करने की अनुमति देने को लेकर श्रीनगर में उनसे मिला। सरकार मुख्यधारा के नेताओं को रिहा करके उनको अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने की अनुमति देना चाहती है. परन्तु सरकार नहीं चाहती कि कोई इस तरह का बयान इन नेताओं की तरफ़ से आये जो स्थिति को और बि’गाड़ दे.

सूत्रों ने बताया कि उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए कुछ और समय मांगा है। हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक को इसी सप्ताह रिहा कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने कोई भ’ड़काऊ बयान नहीं देने का आश्वा’सन दिया है। गिरफ्ता’री के बाद से उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को लोगों से मिलने से म’ना कर दिया गया है।

उमर अब्दुल्ला को हरि निवास में कैद रखा गया है जबकि महबूबा मुफ्ती को चस्मा शाही अतिथिशाला में रखा गया है। उमर के पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी गुपकर रोड स्थित अपने घर में नज़रबं’द हैं। उनको भी लोगों से मिलने की इजाजत नहीं है। आपको बता दें कि जब संसद में कुछ नेताओं ने फ़ारूक़ की गिरफ़्ता’री पर सवाल उठाया था तब गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि अब्दुल्ला अपनी मर्ज़ी से अपने घर में हैं.

नेशनल कान्फ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) दोनों दलों के श्रीनगर स्थित मुख्यालय सूने पड़े हैं। मुख्यालय के पास सिर्फ सुरक्षाकर्मी हैं। विश्लेषक बताते हैं कि सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का मकसद प्रदेश की मुख्यधारा के राजनीतिक दलों के नेताओं की गिर’फ्तारी को लेकर हो रही आलोचना से बचना हो सकता है।

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Arghwan Rabbhi is a researcher and journalist.

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