फ़िलिस्तीन वि’रोधी नेता को फिर नहीं मिला ब’हुमत, इज़राइल में रहेगा राजनी’तिक सं’कट

March 24, 2021 by No Comments

तेल-अवीव: इज़राइल में पिछले दो साल से चल रहे राजनीतिक सं’कट का हल निकलता हुआ नहीं दिख रहा है. दो साल में चौथे आम चुनाव के एग्जिट पोल आ गए हैं. इसके मुताबिक़ देश की सबसे बड़ी पार्टी बेंजामिन नेतान्याहू की लिकुद रहेगी लेकिन इसकी सीटें बहुमत के आँ’कड़े से बहुत दू’र हैं. 120 सदस्यीय क्नेसेट (इज़राइल की लोकसभा) में 61 सीटें बहुमत के लिए ज़रूरी हैं. ऐसे में लिकुद बड़ी पार्टी बन तो गई है लेकिन इसको बहुमत के लिए बहुत सीटें चाहिएँ.

अनुमान है कि लिकुद 30 या 31 सीटें जीत सकती है, इस तरह से ब’हुमत के लिए उसे इतनी ही और सीटें भी चाहिए होंगी. इससे साफ़ है कि चुनाव के नतीजे अ’स्पष्ट ही रहेंगे. वहीं दूसरी ओर दक्षि’णपंथी नेता ने’तान्याहू ने अपनी जीत का दा’वा कर दिया. उन्होंने फ़ेसबुक पर एक बयान जारी किया और कहा कि इजराइलियों ने ‘दक्षि’णपंथ और मेरी नेतृत्व वाली लिकुद पार्टी को बड़ी जीत दी है.

आपको बता दें कि मंगल के रोज़ वो’ट डाले गए. प्रधानमंत्री नेतान्याहू पर भ्र’ष्टाचार के गं’भीर आरो’प हैं और साथ ही उनके मौजूदा कार्यकाल की क’ड़ी आ’लोचना हुई है. विपक्षी दलों का कहना है कि नेतान्याहू ने को’रोना वाय’रस के दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर दक्षि’णपंथी रै’लियों को होने दिया जिसकी वजह से को’रोना तेज़ी से फैला.

उनका कहना है कि नेतन्याहू अपनी घोर रूढ़िवादी राजनीतिक रैलियों पर रोक लगने में नाकाम रहे जिससे वाय’रस का प्रसार हुआ. वे देश की ख’राब अर्थव्यवस्था, और बेरोज’गारी को भी मुद्दा बना रहे हैं. विरोधियों का कहना है कि नेतन्याहू ऐसे समय पर शासन करने के योग्य नहीं हैं जब उनके खिलाफ भ्रष्टा’चार के कई मामले चल रहे हैं. हालांकि नेतन्याहू ने इन आरोपों से इ’नकार किया है. नेतान्याहू को फ़िलिस्तीन और अरब वि’रोधी नेता माना जाता है. उनके दल पर अक्सर क’ट्टरवाद बढ़ाने के आरो’प लगते रहे हैं.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *