यूरोप के मुस्लिम देश में फ़ेल हो गई ट्रम्प की नीति, चुनाव हारते ही सब..

December 22, 2020 by No Comments

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जो फ़ैसले अपने कार्यकाल के दौरान लिए थे अब उन्हीं के ख़िलाफ़ माहौल बनता दिख रहा है. ऐसा सिर्फ़ अमरीका में ही नहीं हो रहा है बल्कि उन देशों में भी हो रहा है जिनमें अमरीकी नेताओं का प्रभाव रहता है. कुछ इसी तरह का मामला कोसोवो में देखने को मिल रहा है. कोसोवो की मौजूदा विपक्षी पार्टी ने ये आरोप लगाये थे कि उसकी सरकार डोनाल्ड ट्रम्प के इशारे पर गिराई गई. अब जबकि डोनाल्ड ट्रम्प ख़ुद राष्ट्रपति चुनाव हार गए हैं तो राजनीति बदल रही है.

आपको बता दें कि मार्च में वेतेवेनदोस्जे के नेता अल्बिन कुर्ती की सरकार को एक नो-कॉन्फिडेंस मोशन के ज़रिए अव्दुल्लाह होती की डेमोक्रेटिक लीग ऑफ़ कोसोवो ने गिरा दिया था और फिर होती प्रधानमंत्री बन गए. राजनीतिक दाँव पेंच कुछ ऐसा चला कि अल्बिन कुर्ती ने क़ानूनी लड़ाई में जीत हासिल कर ली है. यूरोप के इस मुस्लिम देश में अब दुबारा चुनाव का रास्ता साफ़ हो गया है. अदालत के फ़ैसले के बाद चुनाव का रास्ता साफ़ हुआ है. कोसोवो की सर्वोच्च कोर्ट ने जून में हुए पार्लियामेंट्री वोट को असंवैधानिक बताया है. कोसोवो की संवैधानिक अदालत ने 21 दिसम्बर को ये फ़ैसला किया कि प्रधानमंत्री अव्दुल्लाह होती का चुनाव अवैध है.

अदालत के फ़ैसले की वजह से होती को तो झटका लगा ही है, साथ ही डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकार ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इतने छोटे देश में ट्रम्प ने बिना सोचे समझे क़दम क्यूँ उठाये. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री होती के चुनाव को अवैध बताने के पीछे कारण ये बताया जा रहा है कि एक सदस्य जोकि पहले जेल में सज़ा काट चुका है, उसने भी वोट किया. होती की सरकार को एतेम अरीफ़ी का भी समर्थन हासिल हुआ था जिसके बाद होती की सरकार को 61 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हुआ. 120 सदस्यों वाली पार्लियामेंट में 61 सदस्यों के समर्थन के बिना सरकार नहीं बन सकती. ऐसे में अरीफ़ी के एक वोट की ख़ासी एहमीयत मानी गई.

अदालत ने कहा कि सरकार के पास ज़रूरी बहुमत नहीं है और कोसोवो के राष्ट्रपति को निर्देश दिया कि फ़्रेश चुनाव कराए जाएँ जोकि 40 दिनों के अन्दर होने चाहिएँ. अदालत ने कहा है कि मौजूदा सरकार नई पार्लियामेंट के चुने जाने तक काम कर सकती है. इस सम्बन्ध में राष्ट्रपति कार्यालय से ज़रूरी कामकाज शुरू हो गए हैं. आपको बता दें कि सरकार के ख़िलाफ़ शिकायत वामपंथी-राष्ट्रवादी विपक्षी पार्टी वेतेवेनदोस्जे ने दर्ज कराई थी.

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